बागेश्वर के मेलाडुंगरी में स्वयं बनाई राखियों के साथ अर्चना भंडारी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। एक दौर था जब राखियां खरीदने के लिए बाजार की दौड़ लगानी पड़ती थी। अब ऑनलाइन बाजार के बढ़ते प्रभाव से राखियां घर पर ही पहुंच जाती हैं। इसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली कलाकारों को भी मिलने लगा है। जिले की दो प्रतिभावान कलाकार नेहा बघरी मेहता और अर्चना भंडारी भी अपनी बनाई राखियों को आसानी से घर-घर तक पहुंचा रही हैं। ऑनलाइन माध्यम से उनकी प्रतिभा को पहचान मिल रही है और राखियों की बिक्री से अच्छा मुनाफा भी हो रहा है।
जिला मुख्यालय के भागीरथी निवासी नेहा बघरी मेहता ने वर्ष 2018 में घर पर राखी बनाना शुरू किया था। उन्होंने गत्ते, चीड़ की छाल (बगेट) और रक्षा तागे से राखी बनाकर ऐपण आर्ट से उन्हें खूबसूरत बनाया। अपनी बनाई राखियों को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया। देखते ही देखते उनके पास राखियों की मांग आने लगी। पहले साल की अच्छी बिक्री से उत्साहित होकर उन्होंने इसे बड़े स्तर पर शुरू किया और अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ना शुरू किया। वर्तमान में उनके साथ 30 महिलाएं भी राखी बनाने का कार्य कर रही हैं। नेहा अपनी राखियों की बिक्री ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करती हैं।
गरुड़ के मेलाडुंगरी निवासी अर्चना भंडारी ने वर्ष 2019 में पहली बार घर पर राखी बनाना शुरू किया। वह घर में निष्प्रोज्य हो चुकी वस्तुओं का प्रयोग कर राखियां बनाती हैं। उनकी बनाई राखियों में भी ऐपण आर्ट का समावेश रहता है। अर्चना ने बताया कि शुरू में उन्हें अपनी बनाई राखियों को लोगों तक पहुंचाने में कुछ परेशानी हुई लेकिन ऑनलाइन माध्यम से उनकी प्रतिभा को लोगों तक पहुंचाने में काफी सहयोग किया। अब रक्षाबंधन से एक-दो महीने पहले ही उनके पास मांग आने लगती है। ऑनलाइन के अलावा अपने और आसपास के गांवों में भी वह राखियों की बिक्री कर मुनाफा कमा रही हैं।
बागेश्वर में स्वनिर्मित राखियां दिखातीं नेहा बघरी मेहता। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : BAGESHWAR