बागेश्वर। उत्तरायणी कौतिक के शुभारंभ से पहले निकलने वाली झांकी मेले का मुख्य आकर्षक होती है। झांकी को देखने के लिए सैकड़ों लोग उमड़ते हैं। इस दौरान तहसील मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर रोक रहती है। सड़क किनारे खड़े दोपहिया वाहन भी हटा दिए जाते हैं। इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। एक ओर से झांकी निकल रही थी तो दूसरी ओर से वाहनों की आवाजाही जारी थी। सड़क किनारे खड़े दोपहिया भी जस के तस थे। झांकी के दौरान हुई इन अव्यवस्थाओं के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बीते वर्षों तक रवानगी से पूर्व झांकी को व्यवस्थित तरीके से लाइनबद्ध किया जाता था। मुख्य अतिथि तहसील गेट से हरी झंडी दिखाकर झांकी को रवाना करते थे। इस दौरान सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोक दी जाती थी। इस साल का दृश्य एकदम बदला नजर आया। झांकी में शामिल होने वालों को कतारबद्ध नहीं किया गया। झांकी में शामिल होने वाले विद्यार्थी और कलाकार चक्कर काटते देखे गए। झांकी की रवानगी 11 बजे होनी थी लेकिन कोई हरी झंडी दिखाने वाला ही नहीं था। 11 बजते ही झांकी बिना हरी झंडी के रवाना होने लगी। सड़क पर पहुंचते ही झांकी में शामिल लोगों के कदम जाम ने ठिठका दिए। सड़क किनारे कतार से दोपहिया वाहन खड़े थे। बीच सड़क पर निजी वाहन, माल वाहक वाहन और सरकारी विभागों के वाहन दौड़ रहे थे। यह हालात तब हुए जब तीन दिन पहले की यातायात परिवर्तन का प्लान जारी हो गया था। पुलिस कर्मी पिछले तीन दिन से तहसील परिसर के आसपास खड़े वाहनों को हटाने की चेतावनी दे रहे थे लेकिन सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाने की जहमत नहीं उठाई।
झांकी को निहारते रहे पुलिस कर्मी
बागेश्वर। करीब साढ़े 11 बजे झांकी को हरी झंडी दिखाने पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पहुंचे तो उनके साथ आए वाहनों के काफिले ने हालात अधिक खराब कर दिए। जब तक झांकी को हरी झंडी दिखाई जाती, झांकी तहसील गेट से आगे बढ़ गई थी। जिन पुलिस कर्मियों को यातायात नियंत्रित करना चाहिए था, वे या तो झांकी को निहारते दिखे या पेट्रोलिंग वाहन में बैठकर जाम का हिस्सा बने। वीआईपी ड्यूटी निभाने में पुलिस कर्मियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी।