पीपीपी मोड में संचालित अस्पतालों की व्यवस्था पर एक बार फिर दाग लगा है। इस बार मामला सीएचसी कपकोट का है, जहां नाइट शिफ्ट में तैनात डॉक्टर पहले तो ड्यूटी पर ही नहीं आए। मरीज के परेशान होने पर विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष की पहल पर जब डॉक्टर अस्पताल पहुंचे भी तो नशे में चूर होकर।
ऐसे में मरीज और उसके परिजनों ने डॉक्टर से इलाज कराने से इंकार करते हुए इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दे दी। सूचना पर पहुंचे एसडीएम केएस टोलिया और तहसीलदार एमएस बिरोड़िया भी मौके पर आए। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने डॉक्टर का मेडिकल कराकर सूचना सीएमओ को भेजने की बात कही। बाद में परिजन मरीज का इलाज कराए बिना ही उसे घर ले गए।
जानकारी के मुताबिक बीते बृहस्पतिवार शाम को चीराबगड़ गांव के प्रेम सिंह की पत्नी प्रभा गढ़िया का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया। परिजन उन्हें लेकर पीपीपी मोड (गंगाशील अस्पताल बरेली की ओर से) में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए। अस्पताल में सिर्र्फ कर्मचारी ही थे, डॉक्टर कोई नहीं था।
जिस डॉक्टर की नाइट शिफ्ट की ड्यूटी थी वह नहीं आए थे। मैनेजर और डाक्टरों को फोन लगाया गया तो किसी ने भी तवज्जो नहीं दी। बात विधायक ललित फर्स्वाण और जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी तक पहुंची। उनके प्रयासों से दो डॉक्टर अस्पताल में आए, लेकिन वह भी नशे की हालत में थे।
डॉक्टरों के नशे में होने का हल्ला होने पर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर का साथी डॉक्टर वहां से खिसक लिया। वहीं, परिजनों ने नशे में चूर डॉक्टर से इलाज कराने से मना कर दिया और इलाज कराए बिना ही मरीज को घर ले गए। इधर, सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष एसपी रायपा मौके पर पहुंचे। कुछ देर बाद एसडीएम और तहसीलदार भी पहुंच गए।
एसडीएम के निर्देश पर प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एनएस टोलिया ने आरोपी डॉक्टर का मेडिकल किया। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी सीएमओ को भेजेंगे। इसके बाद मामला शांत हो गया। थानाध्यक्ष रायपा ने बताया कि मामले में किसी ने भी रिपोर्ट नहीं लिखाई है।
सूचना पर देर शाम पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन से आरोपी डॉक्टर और मैनेजर को तत्काल यहां से हटाने की मांग की। इनमें दीपक गढ़िया, प्रकाश कांडपाल, तारा कपकोटी, दीपक ऐठानी, सुंदर देव, चामू देवली, भुवन शाही, हयात बड़ती, हिम्मत ऐठानी आदि शामिल हैं।