तेंदुए की खाल की तस्करी के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक व्यक्ति को तीन साल का कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। तस्करी के इस दो साल पुराने मामले में अभियुक्त गिरफ्तारी के बाद जमानत पर चल रहा था।
सात जुलाई 2013 को कोतवाली पुलिस की टीम वरिष्ठ उप निरीक्षक सत्य प्रकाश रायपा के नेतृत्व में गश्त कर रही थी। कपकोट के सूपी अंतर्गत तरसाल तोक निवासी खड़क सिंह को श्री रायपा ने यहां बालीघाट तिराहे के पास पकड़ा। खड़क सिंह के बैग से तेंदुए की एक खाल बरामद हुई।
वह खाल को लेकर पैदल ही बागेश्वर की तरफ आ रहा था। कोतवाली में उसके खिलाफ धारा 9/39/51 वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे जेल भेज दिया गया।
मामले की जांच कोतवाल उमी राम आर्या ने की। बाद में उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से जमानत मिल गई। इस बीच मामला न्यायालय में चल रहा था।
सरकार की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी भूपेंद्र सिंह जंगपांगी और सहायक अभियोजन अधिकारी एलएम आर्या ने सात गवाह पेश किए।
शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्र मणी राय ने खड़क सिंह को खाल तस्कारी के मामले में दोषी करार देते हुए तीन साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड जमा नहीें करने पर चार माह की अतिरिक्त सजा होगी। खालों की तस्करी के एक अन्य मामले में दो अभियुक्तों को पिछले हफ्ते भी सजा हो चुकी हैै।