बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने चरस के साथ पकड़े गए दो आरोपियों को दोषमुक्त किया। आरोपियों को पुलिस की ओर से की गई विवेचना में हुई खामियों का लाभ मिला। न्यायालय ने मामले में एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं होने पर दोषियों को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया।
कथानक के अनुसार वादी एसआई कृष्णा गिरी 13 नवंबर 2020 को पुलिस टीम के साथ निजी वाहन से मंडलसेरा बाईपास जाकर चेकिंग अभियान चला रहे थे। चेकिंग के दौरान करीब 1:10 बजे एसओजी टीम के एसआई दीपक बिष्ट, आरक्षी राजेश भट्ट, नरेंद्र गोस्वामी सरकारी वाहन पर वहां पहुंचे। कपकोट से ईको स्पोर्ट्स वाहन पर हरियाणा निवासी कुछ लोगों के चरस लेकर आने की बात कही। कुछ समय बाद मुखबिर की सूचना वाले नंबर का वाहन आता दिखा। पुलिस टीम ने वाहन में सवार विनोद कुमार, निवासी गांधरा, सांपला, रोहतक, हरियाणा और राजेंद्र सिंह, निवासी गांसी कपकोट से पूछताछ की। उनके पास चरस मिली। विनोद कुमार के पास से पुलिस ने 1017.02 ग्राम और राजेंद्र के पास से 1023.04 ग्राम चरस बरामद की।
आरोपियों के खिलाफ कपकोट थाने में 8/20/60 एनडीपीएस अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया। विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश कराए। आरोपी विनोद की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र कोरंगा और राजेंद्र सिंह की ओर से चामू सिंह गस्याल ने मामले की पैरवी की।
विवेचना में खामी
बागेश्वर। न्यायालय ने माना कि 42 एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों में मुखबिर सूचना का मैमो सूचना दिए जाने के स्थान पर बनाया जाना और उसकी एक प्रति 72 घंटे के भीतर उच्चाधिकारी को भेजी जानी आवश्यक है। अदालत ने कहा कि मामले में मुखबिर की ओर से सूचना दिए जाने वाले स्थान पर सूचना मैमो नहीं बना और न ही मुखबिर सूचना की प्रति उच्चाधिकारियों को भेजी गई।वहीं 50 (1) एनडीपीएस अधिनियम के तहत न्यायालय ने माना कि आरोपियों के सहमति पत्र अलग-अलग बनाने का प्राविधान है। मामले में संंयुक्त सहमति पत्र बनाया गया है।