बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने निचली अदालत से मिली सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखने का आदेश पारित किया है।
कथानक के अनुसार एक महिला ने सात अक्तूबर 2019 को एसपी को तहरीर देकर बताया कि वह आयुर्वेदिक अस्पताल में संविदा चिकित्सक के पद पर कार्यरत है। जिला यूनानी आयुर्वेदिक कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक नवीन रावत अपने पद का फायदा उठाते हुए उसे लगातार फोन करता है और फोन पर अश्लील बात करता है। विरोध करने पर वह अधिकारी से नजदीकी होने की बात करता और उसका नौकरी करना मुश्किल करने की धमकी देता है। फोन नहीं उठाने पर व्हाट्सएप के माध्यम से मैसेज भेजकर परेशान करता है। 27 अगस्त 2019 को रात के 12 बजे आरोपी ने फोन करके गालीगलौज की और उपस्थिति पंजिका की फोटो भेजने के लिए कहा। तंग आकर पीड़िता ने उसी दिन ऑनलाइन मामला दर्ज कराया। जांच के दौरान आरोपी पर लगे आरोप सही पाए गए।
पीड़िता की तहरीर के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 354 डी (2), 504, 506, 509 के तहत केस दर्ज किया और न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दो जुलाई 2022 को फैसला सुनाते हुए आरोपी को धारा 354 डी (2) और 509 में दो साल के साधारण कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड, धारा 504 में छह महीने का कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। फैसले के खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की। सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय ने अवर न्यायालय के निर्णय को सही ठहराया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी चंचल सिंह पपोला ने मामले की पैरवी की।