बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने निचली अदालत के सात-सात साल की सजा के आदेश को निरस्त कर वेतन वितरण अनियमितता के दोषी पूर्व जिला युवा कल्याण अधिकारी और वरिष्ठ सहायक को दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया है।
प्रांतीय रक्षक दल युवा कल्याण विभाग के निदेशक के आदेशानुसार प्रभारी युवा कल्याण अधिकारी अर्जुन सिंह रावत ने 20 सितंबर 2018 को पूर्व जिला कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी जीवन लाल आर्य और वरिष्ठ सहायक चित्रा पांडेय के खिलाफ बागेश्वर कोतवाली में तहरीर दी। इसमें बताया गया कि आरोपी एक जून 2013 से 31 दिसंबर 2013 तक जिला युवा कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात था।
इस दौरान आरोपी ने वेतन वितरण में अनियमितता की। अधिकारी ने राजकोष से 2,45,880 रुपये की राशि आहरित कर सात स्वयंसेवकों को नकद भुगतान की। दो स्वयंसेवकों को क्रमश: 51,750 और 13,180 रुपये का भुगतान किया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 420 और 120 बी के तहत केस दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। न्यायालय ने जीवन और चित्रा को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ आरोपियों ने सत्र न्यायालय में अपील की। सत्र न्यायालय ने जीवन के मामले में साक्ष्यों का परिशीलन कर पाया कि मामले में धारा 197 के तहत अभियोजन चलाने के लिए सरकार की अनुमति नहीं ली गई थी। इस कारण मामले की प्रक्रिया को दूषित मानते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त किया गया।
वहीं चित्रा के मामले में न्यायालय ने कहा कि अवर न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों का उचित प्रकार से विश्लेषण न कर वैधानिक त्रुटि की है। इस कारण दोषसिद्ध के आदेश को निरस्त किया जाता है। जीवन की ओर से अधिवक्ता हरीश चंद्र जोशी, दिग्विजय सिंह जनौटी, हरीश चंद्र आर्या और चित्रा पांडेय की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र कोरंगा ने मामले की पैरवी की।