स्वच्छ ग्रामीण भारत के तहत देश भर में पहला स्थान पाने वाले बागेश्वर जिले की 416 ग्राम पंचायतों में 17,105 नए शौचालयों का निर्माण किया गया। इस कार्य में चार साल का समय लगा। इसमें खुले में शौच करने वाले परिवारों को प्रोत्साहित करना बड़ी चुनौती थी। इस काम में ग्राम प्रधानों का सहयोग तो रहा ही, आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से गांव-गांव में चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भारत सरकार की ओर से स्वच्छता दर्पण के तहत देश भर में धरातलीय सर्वेक्षण किया गया था। स्वजल परियोजना के माध्यम से 2012 में बागेश्वर जिले में 416 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 59,892 घरों का सर्वे किया गया। इस सर्वे में बागेश्वर, गरुड़ और कपकोट विकासखंडों में लगभग 17,105 परिवार शौचालय विहीन मिले। इसके बाद स्वजल द्वारा गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को शौचालय निर्माण के लिए जागरूक किया गया।
गांवों में स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व बताते हुए जागरूकता संबंधी गोष्ठियां और अन्य कार्यक्रम चलाए गए। इसमें आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शौचालय विहीन हर परिवार को शौचालय निर्माण के लिए शासन से स्वीकृत 12 हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई। इसके बाद ग्रामीण शौचालय बनाने के लिए तैयार हुए।
खास बात यह रही कि धनराशि उपलब्ध कराने के बावजूद शौचालय का निर्माण नहीं करने वाले कुछ ग्रामीणों को पेयजल या बिजली का संयोजन काटने तक की चेतावनी भी देनी पड़ी। इसके अलावा कुछ गांवों में आयोजित बैठकों में खुले में शौच करने वाले ग्रामीणों के लिए तालियां बजाई गईं। यह तमाम तरह के उपाय आखिर सफल हुए और हर परिवार ने शौचालय का निर्माण कराया।
इस योजना के लिए 15,844 घरों में स्वजल के माध्यम से जबकि 1261 घरों में मनरेगा के माध्यम से शौचालयों का निर्माण कराया गया। जनवरी 2017 में जिले के सभी 17,105 घरों में शौचालय का निर्माण करके बागेश्वर जिले ने शत प्रतिशत शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य हासिल कर लिया।
शत प्रतिशत शौचालय निर्माण की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने के बाद भारत सरकार की ओर से गठित टीम के सदस्यों ने जिले की सभी 416 ग्राम पंचायतों में सर्वे कर शौचालयों का निर्माण और इनके उपयोग की रिपोर्ट तैयार की। जिला प्रशासन की ओर से हर गांव में शौचालयों के फोटोग्राफ्स और अन्य दस्तावेज पेयजल मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किए गए। सरकार की ओर से जारी ओवरऑल रैंकिंग में जिले को देश और राज्य दोनों स्तर पर पहला स्थान हासिल हुआ।
खुले में शौच करने वाले ग्रामीणों को शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कई बार गांव-गांव में जाकर कार्यक्रम और गोष्ठियां आयोजित की गईं। इसमें ग्राम प्रधान, आशा कार्यकर्ता और ग्राम विकास अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सभी के सहयोग से शत प्रतिशत शौचालय निर्माण में सफलता मिली।
- केएन तिवारी, जिला विकास अधिकारी।
- खुले में शौच करने वाले ग्रामीणों को मनाना आसान नहीं था। लगभग दो साल पहले तक करीब 150 परिवारों के पास शौचालय नहीं थे। शौचालय नहीं बनाने वाले परिवारों के मुखिया को पानी, बिजली जैसी सुविधाओं से वंचित रखने की चेतावनी तक देनी पड़ी। खुले में शौच करने वालों के लिए खुली बैठकों में तालियां बजाई गई। आखिरकार सफलता मिली। आज हर परिवार के पास शौचालय है।
- कैलाश सिंह गड़िया, ग्राम प्रधान, बिलौना।