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सीएम साहब! चौथी बार भी महज घोषणा ही न रह जाए 

Sat, 13 Jan 2018 10:57 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय, बागेश्वर।
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वर्ष 2011 में मेले का उद्घाटन करते सीएम निशंक। - फोटो : amar ujala
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वर्ष 2011, 2013 और वर्ष 2016 यह तीनों ही साल बागेश्वर जिले के लिए खास बनते-बनते मजाक बनकर रह गए। इन तीनों ही वर्षों में तीन मुख्यमंत्रियों ने बागेश्वर के उत्तरायणी मेले को राजकीय मेला घोषित ‌किया, लेकिन यह हो नहीं पाया।
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अब त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रदेश के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री जरूर बन गए, जिन्होंने शनिवार को उत्तरायणी मेले के उद्घाटन के दौरान इस मेले को राजकीय मेला घोषित किया। देखने वाली बात यह होगी कि मेले को राजकीय घोषित करने का यह सिलसिला यहीं थम जाएगा या फिर बागेश्वर की जनता अगले साल फिर इस घोषणा को नये सिरे से सुनेगी। 

सरयू और गोमती के संगम पर लगने वाला बागेश्वर का उत्तरायणी मेला ऐतिहासिक महत्व का मेला है। मकर संक्रांति के दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। इस मेले में कुमाऊं के साथ ही गढ़वाल और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु आते हैं। यहां लगने वाले मेले के महत्व को देखते हुए वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उत्तरायणी मेले को राज्य मेला घोषित करने की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा कोरी रही।
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इसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई और वर्ष 2013 में मेले के उद्घाटन के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी इस मेले को राजकीय मेला घोषित किया, पर इस बार भी यह ऐलान हवाई ही साबित हुआ। इस घोषणा के तीन वर्ष बाद वर्ष 2016 में कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फोन पर संबोधन करते हुए मेले को संरक्षित करने का आश्वासन दिया गया।

इसके बावजूद यह मेला राजकीय घोषित नहीं हो सका। अब वर्ष 2018 में उत्तरायणी मेले को राजकीय मेला घोषित करने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत चौथे मुख्यमंत्री बन गए हैं। शनिवार को त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से मेले को राजकीय मेला घोषित करने की घोषणा करने के बाद लोगों में चौथे मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी होगी या नहीं यह चर्चा का विषय बना रहा। 

अधिवक्ता भंडारी ने सीएम को दिखाई अमर उजाला की खबर
बागेश्वर। शनिवार को उत्तरायणी मेले का उद्घाटन करने आए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अधिवक्ता गोविंद सिंह भंडारी ने अमर उजाला की खबर दिखाई। तीन सीएम की घोषणा मगर राज्य मेले का दर्जा नहीं शीर्षक से प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने मंच से बागेश्वर के मेले को राजकीय मेला घोषित करने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों से उन्हें मेले के संबंध में यह जानकारी मिली है। राजकीय मेला घोषित होने पर मेले के आयोजन के लिए राज्य सरकार से बजट मिलेगा। इससे मेले के प्रचार-प्रसार और आयोजन में बजट की कमी नहीं रहेगी।
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