अल्मोड़ा। बारिश के बाद भी जिले में जंगलों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस कारण आम लोगों के साथ ही वन विभाग भी परेशान है। पौसर, शीतलाखेत, बिमौला के जंगल सुलगते रहे, जिससे लाखों की वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा हैं। वहीं वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी संकट के बादल गहरा गए हैं।
बीते दिनों बारिश होने से वन विभाग को जंगलों की आग बुझने की उम्मीद थी। लेकिन उसकी यह उम्मीद पर पानी फिरा है। बारिश के बाद भी जिले के कई जंगल अब भी सुलग रहे हैं। पौसर, शीतलाखेत और बिमौला के जंगल बीते बुधवार से धधक रहे हैं। दूसरे दिन भी इन जंगलों में आग की लपटें उठती रहीं, जिससे वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा है। बावजूद इसके वन विभाग मौके पर नहीं पहुंच सका है। जबकि स्थानीय लोग आग बुझाने में जुटे रहे। जंगलों में आग लगने से वन्य जीवों का जीवन भी खतरे में हैं। बावजूद इसके आग बुझाने के सभी दावे हवाई साबित हुए हैं। संवाद
फायर सीजन में जले 120 हेक्टेयर जंगल
अल्मोड़ा। जिले में फायर सीजन शुरू होते ही 155 क्रू सेंटर स्थापित कर जंगलों को सुरक्षित बचाने के दावे किए गए थे। लेकिन अब तक ये दावे बेअसर साबित हुए हैं। इस बार मौसम का साथ मिलने से जंगलों में आग लगने की घटनाएं कम होने से वन विभाग के चेहरे पर मुस्कान रही। लेकिन इसके बाद भी अब तक 78 घटनाओं में जिले भर में 120 हेक्टेयर दावानल की भेंट चढ़े हैं, जो वन विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह है।
स्थानीय लोग खुद जंगलों में आग लगा रहे हैं। इसके बाद भी विभाग आग बुझाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
मोहन राम आर्या, रेंजर, अल्मोड़ा।