अल्मोड़ा। नगर के लोग जर्जर बिजली के खंभों के सहारे गुजर रही बिजली लाइन के नीचे आवाजाही को मजबूर हैं। नगर में अधिकांश रास्तों पर जर्जर बिजली के खंभे दुर्घटना को दावत दे रहे हैं जिन्हें बदलने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में खतरा बढ़ गया है जिससे यूपीसीएल और प्रशासन अंजान है।
सोमवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने नगर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर खतरा बने जर्जर बिजली के खंभों की पड़ताल की। नगर में 40 से अधिक खंभे ऐसे मिले जो पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, उनके गिरने का खतरा बना हुआ है। माल रोड स्थित पीएनबी बैंक के समीम खड़ा बिजली का पोल नीचे से गल चुका है तो जाखन देवी में सड़क किनारे स्थित खंभा आधा झुका हुआ है। एसएसजे परिसर को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर एक खंभा लंबे समय से पेड़ के सहरे खड़ा है। वहीं अल्मोड़ा-हल्द्वानी एनएच पर खोल्टा, कर्नाटक खोला और एसएसजे परिसर के आवसीय परिसर में जर्जर बिजली के खंभे किसी बड़े खतरे की तरफ इशारा कर रहे हैं। आंधी-तूफान और अन्य किसी कारण से ये जर्जर खंभे गिरे तो बड़ी घटना हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि यूपीसीएल को जर्जर पोलों की जानकारी तो है लेकिन इन्हें बदलने के लिए बजट का रोना रोया जा रहा है। संवाद
जर्जर खंभों से यूपीसीएल कर्मियों को भी खतरा
अल्मोड़ा। जिले में जर्जर बिजली के खंभे यूपीसीएल कर्मियों के लिए भी किसी खतरे से कम नहीं है। खराबी को दूर करने के लिए कर्मी इन खंभों पर चढ़ते हैं जिससे इनके गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे में कर्मी जान जोखिम में डालकर लाइन ठीक करने को मजबूर हैं।
यूपीसीएल ने 400 जर्जर बिजली के खंभों को किया है चिह्नित
अल्मोड़ा। यूपीसीएल ने अल्मोड़ा, जागेश्वर और सोमेश्वर में बिजली के 400 जर्जर खंभों को चिन्हित किया गया है। इन्हें बदलने के लिए 20 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है जो चार माह से धूल फांक रहा है। बजट के अभाव में यूपीसीएल के लिए जर्जर खंभों को बदलकर लोगों को खतरे से मुक्ति दिलाना नामुमकिन साबित हो रहा है।
जर्जर हो चुके बिजली के खंभों को बदलने के लिए प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद ही इन्हें बदला जा सकेगा।- कन्हैया जी मिश्रा, ईई, यूपीसीएल, अल्मोड़ा।