बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने चरस के साथ पकड़े गए आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है। न्यायालय ने गिरफ्तारी और गिरफ्तारी के स्थान को संदेहास्पद होना पाया। अदालत ने जिले की पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए निर्णय की प्रति मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन और पुलिस महानिदेशक को भेजने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि जिस तरह से जिला स्तर पर पुलिस कार्य कर रही है, उससे आम जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इस तथ्य का आंकलन और व्यापक समीक्षा की जानी आवश्यक है।
जानकारी के अनुसार 19 अक्तूबर 2020 को कपकोट थाने में तैनात वादी एसआई सुष्मिता राणा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रीठाबगड़ पुल से करीब 100 मीटर आगे शाम 4:30 बजे 5.213 किलोग्राम चरस के साथ कुंवर सिंह दानू निवासी गोगिना को गिरफ्तार करना दिखाया। आरोपी के खिलाफ 8/20 एनडीपीएस के तहत केस दर्ज किया गया।
न्यायालय में आरोपी के अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा और हेम चंद्र सिंह राणा ने पैरवी करते हुए बताया कि आरोपी को एसओजी की टीम ने उसके गांव से पकड़ा था जबकि रीठाबगड़ से उसकी गिरफ्तारी और चरस बरामदगी शाम 7:10 बजे दिखाई गई। अधिवक्ताओं ने इसे पुष्ट करने के लिए दो साक्षी और दस्तावेज भी दाखिल किए।
न्यायालय ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए अभियोजन के घटनाक्रम और गिरफ्तारी को संदिग्ध माना। आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।
अदालत की तल्ख टिप्पणी
बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि जब एसओजी टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर उससे वाणिज्यिक मात्रा में चरस बरामद की थी, तो पुन: अभियोजन कथानक को बदलकर आरोपी से स्थान रीठाबगड़ में क्यों बरामदगी दिखाई गई? यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर शक पैदा करता है, जो निश्चित तौर पर पुलिस प्रशासन की लापरवाही और तथ्यों को छिपाए जाने के कृत्य को दृष्टिगोचर करता है।
अदालत ने कहा कि यह विचारणीय प्रश्न है कि उत्तराखंड राज्य की आम जनता किस प्रकार सुरक्षित है। जब किसी व्यक्ति को जबरदस्ती जीप में बैठाकर गिरफ्तार किया जाता है, उससे अवैध मादक पदार्थ की बरामदगी दिखाई जाती है। इससे पुलिस की वर्तमान की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न उठना स्वाभाविक है।
न्यायालय ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दूषित कार्यशैली की पराकाष्ठा है कि जिस एसओजी की टीम की ओर से आरोपी को जबरदस्ती जीप में बैठाकर ले जाना और उससे मारपीट करना बताया गया है, उसी टीम के एक सदस्य को पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र की ओर से बेस्ट इंपलाइ ऑफ द मंथ के पुरस्कार से नवाजा जाता है।
न्यायालय ने कहा कि यदि पुलिस ने अपनी कार्यशैली में बदलाव न किया और शीर्ष अधिकारियों इस बाबत कोई ठोस कदम न उठाया तो निश्चित तौर पर पूरे प्रदेश में अराजकता का साम्राज्य स्थापित होगा, जो कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के विपरीत है। संवाद