संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। गोमती नदी के किनारे स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल मालदे मानसून काल में खतरे की जद में आ जाता है। बरसात में नदी का जलस्तर विद्यालय तक पहुंच जाता है। तीन बार नदी का पानी और मलबा विद्यालय भवन को नुकसान पहुंचा चुका है। इसके बावजूद विभाग ने सुरक्षा के उचित इंतजाम नहीं किए हैं। बरसात शुरू होने के बाद विद्यार्थियों और शिक्षकों को फिर डर सताने लगा है।
राजूहा मालदे की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। गोमती नदी से करीब 25 मीटर की दूरी पर ही विद्यालय भवन है। वर्तमान में छात्र संख्या 28 हैं। तेज बारिश होते ही शिक्षकों की नजर बार-बार गोमती नदी की ओर जाने लगती हैं। प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार वर्मा बताते हैं कि विद्यालय के लिए गोमती नदी का बढ़ा जलस्तर खतरा बन जाता है।
वर्ष 2013 में पहली बार गोमती नदी का पानी और मलबा भारी मात्रा में विद्यालय में घुस गया था। खेल मैदान में मलबा भर गया तो कक्षों के भीतर तक पानी जमा हो गया था। वर्ष 2017 में फिर वही मंजर देखने को मिला। रसोई और शौचालय के कमरे भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। 2019 में भी यही हाल हुआ। कमरों में कीचड़ और मलबा भर गया। विद्यालय का मैदान बजरी, कीचड़ और मलबे से पट गया। बमुश्किल विद्यालय की सफाई की थी।
तटबंध और मजबूत सुरक्षा दीवार की जरूरत
बागेश्वर। जब-जब बारिश का पानी और मलबा विद्यालय में घुसा है, स्कूल की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हुई है। हर बार विद्यालय प्रबंधन ने जनप्रतिनिधियों की मदद लेकर सुरक्षा दीवार का निर्माण करवाया है, लेकिन विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। प्रधानाध्यापक वर्मा बताते हैं कि विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है। जब तक गोमती नदी के किनारे तटबंध और विद्यालय की मजबूत चहारदीवारी नहीं बनेगी तब तक स्कूल के लिए खतरा बना रहेगा।
- विद्यालय के पास गोमती नदी में तटबंध निर्माण के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा जाएगा। सुरक्षा दीवार का निर्माण कराने के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजेंगे। - जीएस सौन, सीईओ, बागेश्वर