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आंखिरकार बागेश्वर में रोडवेज डिपो को मिली प्रशासनिक स्वीकृति

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बागेश्वर में धरना देते उपनल कर्मी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। बागेश्वर में उत्तराखंड परिवहन निगम का डिपो स्थापित करने की दिशा में सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाया है। शासन ने बागेश्वर में रोडवेज डिपो को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
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उत्तराखंड शासन के सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने बीते 18 जुलाई को परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को भेजे शासनादेश में बागेश्वर में रोडवेज डिपो को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने की जानकारी दी है। सचिव ने प्रबंध निदेशक से इस संबंध में आगे की कार्यवाही करने को कहा है। परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक ने बीते 14 जुलाई को बागेश्वर में परिवहन निगम का डिपो खोलने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति देने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
बागेश्वर में रोडवेज डिपो खोलने की मांग काफी पुरानी है। जिले में अल्मोड़ा डिपो की छह लंबी दूरी की बसों का संचालन होता है। जिले के आंतरिक मार्गों पर रोडवेज की बसों का संचालन नहीं होता है। यूपी काल में संचालित अधिकतर बस सेवाएं बंद हो गई हैं। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास के परिवहन मंत्री बनने के बाद डिपो की आस लगाई जा रही थी। मंत्री बनने के बाद उन्होंने डिपो की स्थापना की बात कही थी। उसके अनुरूप कार्यवाही आगे बढ़ी है।
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वर्ष 2019 में बन गया था तीन करोड़ लागत का भवन
बागेश्वर। बागेश्वर में रोडवेज का डिपो खोलने की कवायद काफी पहले शुरू हो गई थी। डिपो के भवन के लिए शासन ने करीब तीन करोड़ रुपये की रकम स्वीकृत की। वर्ष 2019 के अंत में भवन बनकर तैयार हो गया। लोगों को उम्मीद थी कि जल्द डिपो का शुभारंभ होगा लेकिन लोगों की आस धरी की धरी रह गई। 19 फरवरी 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, तत्कालीन परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने डिपो के स्थान पर रोडवेज स्टेशन का लोकार्पण कर दिया। इससे जिले के लोगों को काफी मायूसी हुई थी।
डिपो के लिए अमर उजाला तीन साल से छेड़े हुए है मुहिम
बागेश्वर। 19 फरवरी 2020 को रोडवेज डिपो के भवन का रोडवेज स्टेशन के रूप में लोकार्पण करने पर अमर उजाला ने लगातार सवाल खड़े किए थे। फरवरी 2020 से इस मुद्दे पर लगातार सरकार और जनप्रतिनिधियों को घेरने का काम किया। मार्च 2020 में परिवहन निगम ने 6 बसों को बागेश्वर डिपो के नाम से आवंटित भी कर दिया था लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण मामला खटाई में पड़ गया। इसके बाद भी अमर उजाला ने डिपो की मुहिम छेड़े रखी। अमर उजाला जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने में कामयाब रहा। डिपो को प्रशासनिक स्वीकृति मिलने से जिले के लोगों को परिवहन व्यवस्था पुख्ता होने की उम्मीद है।
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