बागेश्वर। कपकोट तहसील मुख्यालय के समीपवर्ती गांव नरगड़ा और भैसुड़ी कुटेर के लोगों को अब तक वाहन सुविधा का लाभ नहीं मिला है। गांव के लिए वर्ष 2016-17 में स्वीकृत सड़क नहीं बनने से ग्रामीणों को छह किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है।
नरगड़ा और भैसुड़ी कुटेर की आबादी करीब 1600 है। गांव के लोग खेतीबाड़ी और पशुपालन करते हैं। गांव के लोग बेहतर आजीविका कमा सकते हैं लेकिन सड़क नहीं होने से लोगों को बाजार तक उत्पाद लाने में परेशानी होती है।
नरगड़ा की ग्राम प्रधान भागीरथी देवी, सामाजिक कार्यकर्ता तारा सिंह ने बताया कि गांव के लिए भयूं-गुलेर मोटर मार्ग के हितंग घाट से आठ किमी सड़क स्वीकृत है। अब तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। सड़क नहीं होने से बुजुर्गों और मरीजों को सड़क तक आने के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। विद्यार्थियों को भी पांच-छह किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। ग्रामीण गांव से फरसाली तक पैदल जाते हैं। यहां जहां से वाहन की मदद से कपकोट और भराड़ी पहुंचते हैं। सड़क नहीं होने से गांव से पलायन भी बढ़ता जा रहा है।
इधर, लोनिवि के सहायक अभियंता जीबी जोशी ने बताया कि सड़क का मामला वन अधिनियम में फंसा है। इसको निस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।