बागेश्वर के जिला अस्पताल में दातों की जांच के लिए अभिभावकों के साथ पहुंचे विद्यार्थी।
बागेश्वर। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जमीनी हकीकत दावों से कोसो दूर नजर आ रही है। योजना के तहत बच्चों की सेहत सुधारने के बड़े-बड़े वादे तो किए जा रहे हैं लेकिन लचर व्यवस्थाओं के कारण नौनिहालों और उनके अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला ग्रामीण क्षेत्र के जीआईसी खुनौली का है। यहां के दो विद्यार्थियों को शनिवार को जिला अस्पताल पहुंचने के निर्देश दिए गए थे लेकिन जब वह अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉक्टर ही नहीं थे।
बीते 23 जुलाई को जीआईसी खुनौली में आरबीएसके की टीम ने स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया था। इस दौरान टीम ने स्कूल के दो विद्यार्थियों में दांतों से जुड़ी समस्याएं पाईं। टीम ने बच्चों को उचित इलाज के लिए शनिवार को जिला अस्पताल पहुंचने के निर्देश दिए। सरकार के इस अभियान पर भरोसा कर अभिभावक अपने काम-धंधे छोड़कर बच्चों की छुट्टी कराकर करीब 40 किलोमीटर का सफर तय कर जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल पहुंचे। जब अभिभावक अपने बच्चों को लेकर जिला अस्पताल के दंत रोग विभाग में पहुंचे, तो वहां दंत रोग विभाग की चिकित्सक अवकाश पर थीं और कक्ष में ताला लटका हुआ था। आरबीएसके जैसी महत्वपूर्ण योजना के तहत जब बच्चों को विशेष रेफरल के साथ अस्पताल भेजा गया था तो विभाग को इसकी पूर्व जानकारी होनी चाहिए थी। चिकित्सक के अवकाश पर होने की सूचना न तो स्कूल प्रबंधन को थी और न ही आरबीएसके टीम को, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को भुगतना पड़ा।
अभिभावक, आनंद पांडेय ने बताया कि स्कूल की छुट्टी कराकर और मजदूरी छोड़कर 40 किलोमीटर दूर बच्चों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। यहां आकर पता चला कि डॉक्टर छुट्टी पर हैं। अगर पहले से पता होता तो इस तरह बच्चों को लेकर धक्के क्यों खाते। सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ऐसी व्यवस्था से सिर्फ गरीबों का समय और पैसा बर्बाद हो रहा है।
अभिभावक, नवीन कांडपाल ने बताया कि आरबीएसके टीम ने खुद ही जिला अस्पताल दिखाने के लिए कहा था। बच्चों के दांत में दर्द था इसलिए हम तुरंत यहां भागे चले आए। अस्पताल में डॉक्टर न मिलने से बच्चों को बिना इलाज के ही मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। विभाग को कम से कम यह तो सुनिश्चित करना चाहिए कि डॉक्टर अपनी सीट पर मौजूद हों।
सीएमओ, डॉ. कुमार आदित्य तिवारी ने बताया कि आरबीएसके टीम का बिना डॉक्टर की उपलब्धता की पुष्टि किए बच्चों को अस्पताल भेजना और समन्वय न होना गंभीर लापरवाही है। मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।