गरुड़ (बागेश्वर)। गरुड़-देवनाई मार्ग की हालत ठीक होती और भगरतोला बैंड के पास सुरक्षा रेलिंग होती तो शायद होटल व्यवसायी भूपाल की जान बच सकती थी। बृहस्पतिवार रात जिस बैंड पर आल्टो दुर्घटनाग्रस्त हुई इस बैंड पर आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
देवनाई घाटी के पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कई बार लोनिवि के उच्चाधिकारियों को सड़क दुरुस्त करने के संबंध में कहा था। विभाग ने सड़क को दुरुस्त नहीं किया। पांच किमी गरुड़ देवनाई मार्ग की मरम्मत और मार्ग पर डामरीकरण में प्रांतीय खंड लोनिवि निर्माण से 1977 से करोड़ों रुपये खर्च कर चुका है।
चार साल पहले लोनिवि ने मार्ग पर डामरीकरण किया था। तब डामरीकरण घटिया होने की शिकायत घाटी के ग्रामीणों ने लोनिवि के अधिकारियों से की। विभाग ने दोबारा डामरीकरण करने का आश्वासन देकर घाटी के लोगों को शांत कराया। गरुड़ देवनाई मार्ग की हालत वर्तमान में जर्जर है। मार्ग पर गरुड़ पुल से उनियाडाक तक कई जगह पर गड्ढे हैं।
नालियों का निर्माण सही तरीके से नहीं होने से बारिश का पानी सड़क पर बहता है। देवनाई घाटी के राजेंद्र बोरा ने बताया कि मार्ग पर डामरीकरण करने और भगरतोला बैंड को चौड़ा करने के संबंध में कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया है। उन्होंने बताया कि भगरतोला बैंड से देवनाई गांव तक सड़क के किनारे सुरक्षा रेलिंग लगी होती तो बृहस्पतिवार रात को आल्टो दुर्घटना में होटल व्यवसायी भूपाल दा की जान बच सकती थी।
भगरतोला के प्रधान चंदन सिंह बोरा, कोलतुलारी के प्रधान मंगल राणा, मां भगवती संगठन के अध्यक्ष किशन बोरा ने बताया कि मार्ग को दुरुस्त करने के संबंध कई बार विभाग के आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत करा दिया है। उन्होंने दुर्घटनाओं के लिए लोनिवि को जिम्मेदार ठहराया है। होटल व्यवसायी भूपाल दा की पारिवारिक स्थिति दयनीय है। अपने मित्र तारा सिंह मेहरा की मदद से उन्होंने कुछ साल पहले गरुड़ बाजार में एक छोटा सा होटल खोला था। होटल की कमाई से वह अपने बच्चों का भरण, पोषण करते थे।