समुद्र सतह से करीब दो हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कपकोट ब्लॉक के सांसद आदर्श गांव सूपी के एक पूर्व सैनिक के खेतों में फूल गोबी लहलहा रही है। बुजुर्ग पूर्व सैनिक ने इस उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांव में अपनी मेहनत से इस असंभव काम को संभव कर दिखाया है। उनके खेत में जहां बरसात के सीजन में होने वाली हर सब्जी पैदा होती है, वहीं उनके खेतों में इस सीजन में होने वाली लाही और टमाटर खूब हो रहे हैं। उनके खेत में प्याज, लहसुन भी लहलहा रही है। खेतों की सिंचाई के लिए वहां पानी का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। लेकिन बुजुुर्ग सैनिक नल से बाल्टियों में पानी भरकर खेेतों की सिंचाई करते हैं।
सांसद आदर्श गांव सूपी में जागरूकता अभियान काम आने लगे हैं। गांव के 70 वर्षीय पूर्व सैनिक कृपाल सिंह के एक नाली के खेत में अब फूल गोबी लगने लगी है। बताते हैं कि वह बागेश्वर के सब्जी बीज विक्रेता आलोक साह के यहां से वरुण प्रजाति का गोबी का बीज लाए थे। इससे पौधशाला तैयार की। एक महीने के बाद पौधों का रोपण किया गया। अब खेतों में ढाई किलो वजन की गोबी पैदा होने लगी है। घर की आवश्यकता पूरी कर वह गोबी को पास पड़ोस में वितरित करते हैं। इसके लिए वह कोई रुपए नहीं लेते हैं। उनके खेतों में प्याज और लहसुन भी लहलहा रही है। धनिया, हल्दी समेत अन्य मशालों का भी उत्पादन हो रहा है।
बरसात में शिमला मिर्च, बैगन, तुरई, करेला और ककड़ी भी प्रचुर मात्रा में होती है। यहां सिंचाई गूल और टंकी की कोई व्यवस्था नहीं है। वह बाल्टियों के जरिए नल से पानी भरकर लाते हैं। इसी पानी का सदुपयोग करखेतों की प्यास बुझाते हैं। ग्रामीण चरण सिंह बताते हैं कि गांव में बंद गोबी तो होती ही है लेकिन फूल गोबी के लिए तो काफी मशक्कत करनी पड़ती है। पूर्व सैनिक ने फूल गोबी का बेहतरीन उत्पादन कर दूसरों को प्रेरणा दी है। उनके द्वारा अपनाई गई तकनीक का ग्रामीणों को अवश्य लाभ मिलेगा।