भाजपा और कांग्रेस के विकास के तमाम दावों के बावजूद भैंसूड़ी नदी के ऊपर पैदल पुल का निर्माण नहीं हो सका है। पुल नहीं होने से बरसात में जहां ट्यांकोट गांव में जरूरी सामान नहीं पहुंच पाता है। वहीं बच्चे भी स्कूल नहीं जा पाते हैं। ग्रामीणों ने कई बार पुल बनाने की मांग की, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। गुस्साए ग्रामीणों ने पुल का शीघ्र निर्माण न होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
पल्ला कमस्यार में बह रही भैंसूड़ी नदी के ऊपर पैदल पुल नहीं होने से बरसात के समय नदी में बाढ़ आने से नदी का स्तर काफी बढ़ जाता है। ट्यांकोट, टकनार, मेहरखाली, खांणी, भैंसूड़ी और कपूरी गांव के लोगों को कई दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। ग्रामीण तीन महीने के लिए जरूरी सामान पहले ही जमा कर लेते हैं। इन दिनों नदी को पार करना किसी भी खतरे से कम नहीं होता है। गांव में जहां जरूरी सामान नहीं पहुंच पाता है। वहीं गांवों के आंगनबाड़ी से लेकर इंटर तक के बच्चे घर में ही रहते हैं।
ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि नेताओं को पुल बनाने की याद सिर्फ चुनाव प्रचार के दौरान ही आती है। बताया कि एक बार पुल की नाप जोख के लिए लोनिवि के अभियंता जरूर आए, लेकिन निर्माण आज तक नहीं हो सका। उन्होंने मांग शीघ्र पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। चेतावनी देने वालों में ग्राम प्रधान विमला देवी, पूर्व प्रधान राजेंद्र मेहरा, हीरा सिंह मेहरा, कुंदन मेहरा आदि शामिल हैं।