उत्तरायणी मेले की समापन की रात हुई घटना ने मेले का मजा किरकिरा कर दिया। मेले में जहां दूर-दराज से पहुंचे लोक कलाकारों ने चार चांद लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। वहीं मुख्यमंत्री हरीश रावत के न आने की कसक भी रही।
20 जनवरी को मेले के समापन वाली रात अराजक तत्वों ने बाहर से आए चार व्यापारियों पर जानलेवा हमलाकर लूटपाट कर दी। इस घटना से कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गए, वहीं मेले का मजा भी किरकिरा हो गया। लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का असर अगले साल के मेले पर पड़ने की आशंका है।
मेले को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए नगर पालिका परिषद ने खूब प्रयास किए थे। मेले के उद्घाटन के लिए 14 जनवरी को मुख्यमंत्री हरीश रावत को आना था, लेकिन ऐन वक्त पर उनका स्वास्थ्य बिगड़ जाने के कारण कार्यक्रम टल गया।
कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण और जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने उन्हें दूसरे दिन आने के लिए राजी तो कर लिया लेकिन स्वास्थ्य के साथ न देने के कारण वह नहीं आ सके। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल और सीएम के औद्योगिक सलाहकार रणजीत रावत ने यहां आकर कार्यकर्ताओं की हौंसला अफजाई की।
इस बार भाजपा के मंच पर प्रदेश के नवनियुक्त अध्यक्ष अजय भट्ट और पूर्व मंत्री बलवंत भौर्याल की गैर मौजूदगी भी कार्यककर्ताओं को खूब खली। बागनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पूरन रावल और पूजापाठ कराने वाले पंडित हेम चंद्र जोशी ने बताया कि इस बार मंदिर में पूजार्थियों की खासी भीड़भाड़ रही।
सरयू, गोमती और सरस्वती के संगम पर स्नान करने वालों की भी कमी नहीं थी। रंगमंच पर सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों के अलावा स्थानीय कलाकारों ने मेलार्थियों के मनोरंजन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
19 जनवरी की रात वॉइस ऑफ इंडिया पवनदीप राजन के गीतों को सुनने के लिए यहां उमड़ी भीड़ बेकाबू हो गई थी। स्थिति संभालने में पुलिस के भी पसीेने छूट गए। इस सबके बावजूद एक घटना ने पुलिस की किरकिरी करा दी।