इस ब्लॉक के रेवती घाटी के बड़ेत ग्राम पंचायत में 2010 में भीषण आपदा आई थी। आपदा से प्राइमरी स्कूल बुरमौला का भवन मलबे में दब गया था। लंबे समय तक भवन के नव निर्माण के लिए बजट नहीं मिला अब बजट मिला तो भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिससे भवन का निर्माण आज तक शुरू नहीं हो सका है। भवन नहीं होने से नौनिहाल खुले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने का खतरा है।
मालूम हो कि 18 अगस्त 2010 को रेवती घाटी में जबरदस्त आपदा आई थी। इस आपदा में क्षेत्र में काफी क्षति हुई थी। भूस्खलन की चपेट में आने से प्राइमरी स्कूल बुरमौला का भवन मलबे में दब गया था। मध्याह्न भोजन का रसोई घर भी मलबे से पट गया। घटना तड़के होने का कारण जनहानि नहीं हुई। तब पाठशाला में 21 बच्चे पंजीकृत थे। बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रशासन ने किराए के मकान की व्यवस्था की थी। कुछ समय मकान का किराया मिला अब वह भी बंद हो गया है। पाठशाला का अपना भवन नहीं होने कारण यहां बच्चों की संख्या घटकर अब 15 रह गई है। भवन नहीं होने के कारण बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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प्रधानाध्यापिका रेवती देवी का कहना है। बरसात के मौसम में वह किराए के मकान में कक्षाएं चलाती हैं बाकी समय खुले में पढ़ाने की मजबूरी है। किराया विद्यालय की निधि से दिया जाता है। ग्राम प्रधान सीता ऐठानी ने बताया कि भवन निर्माण के लिए शासन से 11 लाख रुपए जबकि एक अतिरिक्त कक्ष के निर्माण को दो लाख रुपए मंजूर हुए हैं। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण के लिए भूमि की व्यवस्था के लिए ग्रामीणों से बात की जा रही है।
प्राइमरी पाठशाला बुरमौला के भवन निर्माण के लिए 11 लाख रुपए मंजूर हुए हैं। पाठशाला के नाम पर भूमि का पंजीयन होने पर ही निर्माण कार्य शुरू होगा। ग्राम प्रधान को भूमि शीघ्र उपलब्ध कराकर उसका पंजीयन कराने को कहा गया है।
आरसी मौर्य खंड शिक्षा अधिकारी कपकोट।