गोमती और घांघली नदी में खनन कार्य बंद होने से विकास कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ठेकेदार और ग्राम प्रधान हल्द्वानी आदि शहरों से महंगे दामों में रेता और कंकड़ मंगाने को मजबूर है, जिसके चलते दूर-दराज के गांवों में एक बैग रेता सौ से डेढ़ सौ रुपये में पहुंच रहा है।
कांग्रेस सरकार ने गत वर्ष गोमती और घांघली नदी में रेता खनन के लिए कुछ ठेकेदारों को पट्टे आवंटित किए थे। पट्टे आवंटित होने के बाद पट्टेधारकों ने गत वर्ष जून माह तक नदियों में रेता निकाला।
इस बार पट्टे आवंटित नहीं हुए है, जिसके चलते राजकीय ठेकेदारों और ग्राम प्रधानों को रेता महंगे दामों पर हल्द्वानी आदि बाजारों से मंगवाना पड़ रहा है।
ग्राम प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष नवीन ममगई, मेलाडुंगरी के प्रधान बलवंत सिंह भंडारी, माल्दे की प्रधान कमला बिष्ट, बिमोला के प्रधान हरीश राम, पचना की मोतिमा देवी, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेहता आदि पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि हल्द्वानी का रेता दूर दराज के गांवों में सौ से डेढ़ सौ रुपये प्रति बैग पहुंच रहा है।
इससे निर्माण कार्यों की लागत तीन गुनी से ज्यादा बढ़ रही है। पंचायत प्रतिनिधियों ने डीएम और सीडीओ से पंचायतों के निर्माण कार्यों के लिए सीमेंट की तरह रेत की सप्लाई के लिए अधिकृत डीलर की नियुक्त करने को कहा है।