भागीरथी में कूड़ा साफ करती जेसीबी।
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बागेश्वर में सरयू और गोमती नदियों के साथ त्रिवेणी संगम बनाने वाला भागीरथी नाला जल्दी ही मैल से मुक्त होगा। नाले की सफाई के लिए दूसरे दिन भी नाले में उतरी जेसीबी ने नाले से भारी मात्रा में कचरा और मलबा हटाया गया। जिलाधिकारी समेत अभियान से जुड़े लोगों ने नगरवासियों से भागीरथी नाले की पवित्रता का ध्यान रखने का आह्वान किया है।
बागेश्वर में सरयू, गोमती नदी और भागीरथी नाले का संगम विशेष धार्मिक महत्व रखता है। कहा जाता है कि इस संगम पर स्नान करने से लाखों जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं। भागीरथी आज भले ही एक नाले के रूप में रह गई हो लेकिन इसे कुछ लोग विलुप्त सरस्वती की संज्ञा भी देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भागीरथी के संगम के समीप ही मार्कंडेय ऋषि ने तपस्या की थी। लेकिन आज शहरीकरण के कारण भागीरथी को लोगों ने कूड़ाघर जैसा बना दिया है।
सरयू-गोमती की स्वच्छता को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के बाद अमर उजाला ने नगरवासियों को भागीरथी की सफाई के लिए जागरूक करने की पहल की। यह पहल भी सफल रही। कई जागरूक लोगों ने आगे आकर भागीरथी की सफाई के लिए एक मुहिम शुरू कर दी है। इसमें जिलाधिकारी द्वारा विशेष रुचि लेने के बाद भगीरथी नाले की सफाई कार्य में तेजी आई है।
लोक निर्माण विभाग की जेसीबी से लगातार दूसरे दिन भी नाले में सफाई की गई। भारी मात्रा में जेसीबी ने मलबा हटाया। लगातार नाले की सफाई होने से जल्दी ही भागीरथी के मैल से मुक्त होने की उम्मीद नजर आ रही है। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल सहित इस अभियान से जुड़े लोगों आलोक पांडेय, भूपेंद्र जोशी, शंकर पांडेय ने नगरवासियों से भागीरथी में कूड़ा नहीं डालने की अपील की है।