भारी बारिश के बाद मंगलवार को आधी रात के समय सरयू के उफान पर आने से कपकोट से लेकर बागेश्वर तक सिहर उठा। इससे नदी तट पर रहने रहने वाले लोग दहशत में आ गए। सरयू का जलस्तर बढ़ने पर प्रशासन के कान खड़े हो गए। आधी रात में ही कपकोट से लेकर बागेश्वर तक अलर्ट जारी कर दिया गया। रातभर प्रशासन, पुलिस के सायरन - हूटर बजते रहे। भारी बारिश और नदी के उफनाने से आपदा प्रभावित क्षेत्रों से लेकर तटीय इलाकों के बाशिंदे रात भर सो नहीं सके।
मंगलवार की आधी रात को साढ़े 12 बजे सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान से महज डेढ़ मीटर नीचे रह गया। देर रात से लेकर आधी रात के तीन घंटों में के बीच नदी का जलस्तर पहले की अपेक्षा दो मीटर से अधिक बढ़ गया। नदी के उफनाने और भारी बारिश से संवदेनशील क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका से प्रशासन के कान खड़े हो गए। खतरे को भांपते हुए डीएम रंजना राजगुरु ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की कमान संभाल ली। आनन-फानन में आईआरएस की आपातकालीन बैठक बुलाई गई। इसके साथ ही कपकोट से लेकर बागेश्वर तक अलर्ट कर दिया गया।
आधी रात ही एसडीएम और पटवारियों की टीमों ने संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा किया। कपकोट के संवेदनशील स्थलों के बाशिंदों को आश्रय स्थलों में शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन की अलग-अलग टीमें सायरन और हूटर के साथ पब्लिक एड्रेस सिस्टम में क्षेत्रवासियों को चेतावनी जारी करती रही। टीमों ने प्रभावित आवासीय इलाकों, सड़क और पुुलों का निरीक्षण किया। इधर, सरयू के उफान पर आने और भारी बारिश के बीच क्षेत्रवासी रातभर दहशत में रहे।
12 मोटर मार्ग बंद रहने से 35 हजार लोग यातायात सेवा से वंचित
बागेश्वर। भूस्खलन और मलबा गिरने से जिले में 12 मोटर मार्ग बंद रहे। सड़कें बंद रहने से 35 हजार की आबादी यातायात सेवा से वंचित रही। पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से बंद छह सड़कों ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ाई। दर्जनों गांव एक-दूसरे से सीधा संपर्क टूटने से ग्रामीण घरों में कैद रहने को मजबूर रहे।
बुधवार को भी बागेश्वर-दफौट, कपकोट-पिंडारी, भयू-गडेरा, कपकोट-पोलिंग, धरमघर-सनागाड़, बालीघाट-दोफाड़, बिजोरीझाल, धरमघर-माजखेत, शामा-नौकुड़ी, हरसिला-पुड़कुनी, कपकोट-कर्मी, शामा-लीती मोटर मार्ग बंद रहे। इससे यातायात पर निर्भर लोग आवाजाही नहीं कर पाए। जरूरी हालातों में सफर के लिए उन्हें कई किमी पैदल चलना पड़ा। दूसरी ओर बागेश्वर-कपकोट सड़क पर मलबा आने से दो घंटा यातायात ठप रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों में यात्री फंसे रहे। कार्यदायी संस्था के मलबा हटाने के बाद यातायात सुचारु हुआ।
दो और मकान गिरे, दो गिरने के कगार पर
बागेश्वर। आपदा की मार से जिले में दो और मकान गिर गए। इससे दो परिवार बेघर हो गए। प्रभावितों ने गांव के संबंधियों के घर शरण ली। जबकि दो मकान गिरने की कगार पर आ गए। प्रभावित खतरे के बीच क्षतिग्रस्त मकानों में रहने को मजबूर हैं। इसके साथ ही चार अन्य मकानों को आंशिक नुकसान हुआ है। गोशाला के ध्वस्त होने से एक गाय की भी मौत हो गई है।
बुधवार को बागेश्वर तहसील के बजां गांव में तारा देवी का आवासीय मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गोशाला ध्वस्त हो गई और मलबे में दबकर गाय की मौत हो गई। छह सदस्यीय परिवार को पड़ोसी की शरण लेनी पड़ी। खर्कटम्टा गांव में गोविंदी देवी भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दो सदस्यीय परिवार ने गांव के संबंधी के घर शरण ली। इधर, कपकोट तहसील के कर्मी गांव में मोहन सिंह का मकान आंशिक क्षतिग्रस्त हो गया। छह सदस्यीय परिवार ने क्षतिग्रस्त हिस्सा छोड़ दिया है।
पोथिंग के मदन सिंह के दो मंजिले मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। खर्ककानातोली में बचे सिंह का मकान ध्वस्त हो गया। आठ सदस्यीय परिवार को गांव के संबंधी के घर शरण लेनी पड़ी। भयूं धुरौनी में गणेश गिरी का मकान ध्वस्त हो गया। दो सदस्यीय परिवार बेघर हो गया। सूपी में भूस्खलन से मुन्नी देवी का मकान खतरे की जद में आ गया। कांडा तहसील के शौकियाथल में अंबा देवी का मकान आंशिक नुकसान हुआ। उधर, गरुड़ तहसील के वज्यूला गांव में बद्री दत्त को मकान को हल्का नुकसान पहुंचा। सात सदस्यीय परिवार ने क्षतिग्रस्त हिस्सा छोड़ दिया है।
बारिश की मार से दो पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त
बागेश्वर। बारिश की मार से नदी पर निर्भर पंपिंग योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे क्षेत्र में आपूर्ति ठप पड़ी है। बुधवार को पंद्रहपाली-जखेड़ा पेयजल योजना नदी का जलस्तर बढ़ने और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गई। इसके साथ ही क्षेत्र में आपूर्ति ठप हो गई। उफनाई सरयूू की मार से क्षतिग्रस्त कठायतबाड़ा पंपिंग योजना तीसरे दिन भी दुरुस्त नहीं हो पाई। ईई नंद किशोर ने बताया कि क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत की जा रही है। आपूर्ति सुचारु होने तक प्रभावित क्षेत्र में मांग पर टैंकर से पानी बांटा जाएगा। ब्यूरो
आपदा प्रभावितों ने जल्द विस्थापन की लगाई गुहार
बागेश्वर। आपदा की मार से ग्रामीण अंचलों में जगह-जगह भारी नुकसान हुआ है। खासकर कपकोट ब्लॉक के गांवों में कुदरत की मार ज्यादा पड़ी है। आपदा प्रभावितों ने प्रशासन से जल्द विस्थापन की गुहार लगाई है।
बुधवार को कपकोट के खारबगड़ निवासी आठ परिवारों ने डीएम को ज्ञापन भेजकर विस्थापन की मांग दोहराई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। भारी पत्थर गिर रहे हैं। कभी भी बड़ी आपदा की आशंका बनी है। मौसम खराब होने और भूस्खलन पर खतरे की जद में आए ग्रामीणों को जान बचाकर घरों से बाहर भागना पड़ता है। इस दौरान प्रभावित हरपाल सिंह, केसर सिंह, खड़क सिंह, पान सिंह, आन सिंह, दान सिंह, दीवान सिंह थे।
इधर, तोली के बाशिंदों ने भी डीएम को ज्ञापन सौंपकर खतरा जताया है। बताया कि मकानों के साथ ही राकप्रावि और पंचायत भवन को नुकसान हुआ है। उन्होंने क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत और सुरक्षा के कदम उठाने की मांग की है। इस दौरान प्रभावित प्रताप राम, तारा सिंह, गोपाल राम, शेर सिंह, दलीप सिंह, बालक सिंह थे। उधर, रातिरकेटी के कट्यूडा तोक के बाशिंदों ने आपदा से खतरा जताते हुए जल्द विस्थापन की मांग की है। प्रभावितों ने डीएम को ज्ञापन देकर क्षेत्र की भयावह तस्वीर बताई। ब्यूरो