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Bageshwar News: रमाड़ी के किसान बलवंत ने तिमूर से दिखाई रोजगार की राह

Wed, 11 Oct 2023 11:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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बागेश्वर के रमाड़ी में तिमूर के पेड़ के साथ किसान बलवंत सिंह कार्की। फोटो स्वयं
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बागेश्वर। पहाड़ पर वनस्पतियों से ही लोग मालामाल हो सकते हैं, जरूरत है इस दिशा में काम करने की। बागेश्वर जिले के दूरस्थ क्षेत्र रमाड़ी के एक काश्तकार ने तिमूर उगाकर रोजगार की राह दिखाई है। इस काश्तकार के बागान में तीन साल पहले लगाए गए तिमूर के पौधे फल देने लगे हैं। तिमूर का उपयोग दंतमंजन बनाने के साथ ही मसालों में किया जाता है। आयुर्वेदिक औषधियों में भी इसका प्रयोग होता है।
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तिमूर आमतौर पर पहाड़ के जंगलों में पाया जाता है। आज से कुछ साल पहले गढ़वाल के चमोली जिले के पीपलकोटी में पहली बार तिमूर का व्यावसायिक उत्पादन किया गया। पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में तिमूर का उत्पादन हो रहा है। पीपलकोटी और मुनस्यारी के बाद बागेश्वर का रमाड़ी तिमूर का व्यावसायिक उत्पादन करने वाला राज्य का तीसरा स्थान बन गया है।
रमाड़ी के बलवंत सिंह कार्की ने अपने बगीचे में तिमूर के चार सौ से अधिक पौधे लगाए थे। इस बार इनमें से 11 पौधे फल देने लगे हैं। अगले साल और अधिक पौधों में फल आने की संभावना है। संवाद
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हजार रुपये किलो बेचे तिमूर के बीज के छिलके


बागेश्वर। बलवंत ने बताया कि उन्होंने प्रयोग के तौर पर मासी (चौखुटिया) की एक संस्था को हजार रुपये किलो के हिसाब से दो किलो तिमूर के बीज के छिलके बेचे। एक किलो स्थानीय बाजार में बेचा। उन्होंने बताया कि तिमूर के बीज का छिलका सबसे महंगा बिकता है। पत्ती, लकड़ी भी बिकती है। बताया कि तिमूर के विपणन के लिए सगंध पौधा संस्थान सेलाकुई देहरादून के साथ ही कई कंपनियों से वार्ता चल रही है।



पहाड़ी नीम के नाम से जाना जाता है तिमूर

बागेश्वर। वरिष्ठ आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. नवीन जोशी (एमडी आयुर्वेद) बताते हैं कि तिमूर को पहाड़ी नीम के नाम से भी जाना जाता है। यह खास तौर पर उत्तराखंड में पाई जाती है। इस पौधे का वैज्ञानिक नाम जेनथोजायलम अर्मेटम है। इस पेड़ की पत्तियां, टहनी, बीज फायदेमंद होते हैं। इसके प्रयोग से हाई बीपी को ठीक किया जा सकता है। इसके पत्तों में एक खास तत्व पाया जाता है, जो एंटीसेप्टिक का काम करता है। जब पहाड़ में दंतमंजन नहीं हुआ करता था तो लोग इसी का प्रयोग करते थे। संवाद
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