मानसून काल शुरू होते ही ग्लेशियरों की सैर पर रोक लग गई है। रोमांच के शौकीनों को अब सितंबर तक इंतजार करना पड़ेगा। हिम तेंदुओं पर चल रहा शोध कार्य भी इस दौरान प्रभावित रहेगा। शोधकर्ता टीम के सदस्य वहां लगे कैमरों को वापस लेकर आ रहे हैं। गर्मी के आगमन के साथ ही 15 अप्रैल से जिले के पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर को रोमांच के शौकीनों के लिए खोल दिया जाता है।
15 जून तक देसी-विदेशी पर्यटक यहां ट्रैकिंग करने पहुंचते हैं। सबसे अधिक लोग पिंडारी ग्लेशियर की सैर करते हैं। सुंदरढूंगा और कफनी क्षेत्र में साहसिक अभियान वाले ही जाते हैं। ग्लेशियरों की सैर पर जाने वालों का वन विभाग की हिचौड़ी और जैकुनी चौकी पर पंजीकरण कराया जाता है। पंजीकरण कराने के बाद ही आगे की सैर हो सकती है।
मानसून की शुरूआत होते ही वन विभाग ने पंजीकरण कार्य रोक दिया है। अब चौकी पर तैनात कार्मिक अवैध रूप से लोगों को वहां जाने से रोकने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। बीते अप्रैल में वन विभाग ने ग्लेशियरों में हिम तेंदुओं की मौजूदगी और संख्या का पता लगाने के लिए अभियान शुरू किया था। पिंडारी और कफनी क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। मानसून को देखते हुए इसे भी स्थगित कर दिया है।
बारिश के सीजन को देखते हुए पिंडारी और अन्य ग्लेशियरों की सैर पर रोक लगा दी है। मानसून काल बीतने के बाद 15 सितंबर को फिर से ट्रैक रूट खोल दिए जाएंगे। हिम तेंदुओं की जानकारी जुटाने के लिए लगाए कैमरे भी वापस लाए जा रहे हैं।
-ध्रुव सिंह मर्तोलिया, डीएफओ बागेश्वर