स्वच्छ भारत अभियान के तहत बागेश्वर नगरपालिका ने शत प्रतिशत शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। लक्ष्य पूरा करने के बाद खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित नगरपालिका का भौतिक सत्यापन शुरू हो गया है। शीघ्र ही केंद्र सरकार की टीम यहां आकर निरीक्षण के बाद ओडीएफ पर अंतिम मुहर लगाएगी।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 10 हजार की आबादी वाली बागेश्वर नगरपालिका के पास 345 शौचालय बनाने का लक्ष्य था। इस लक्ष्य को पालिका ने पूरा कर लिया है। शत प्रतिशत शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा करने पर नगरपालिका खुले में शौच से मुक्त घोषित की श्रेणी में आ गई है। नगरपालिका के दावे के बाद सीडीओ की अध्यक्षता में गठित अधिकारियों की चार सदस्यीय टीम द्वारा इसका भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
भौतिक सत्यापन के बाद इसकी रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। इसके बाद केंद्र की एक टीम आकर स्थलीय निरीक्षण कर नगरपालिका के ओडीएफ होने पर अपनी अंतिम मुहर लगाएगी। नगरपालिका के ईओ राजदेव जायसी ने बताया कि पालिका के पास कुल 345 शौचालय बनाने का लक्ष्य था।
इस समय पालिका के अंतर्गत आने वाले सभी परिवारों के पास शौचालय उपलब्ध हैं। सभी प्रमुख स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं। खुले में शौच को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। खुले में शौच करने वालों पर पालिका द्वारा नजर रखी जा रही है। नदी किनारे गंदगी करते पकड़े जाने वाले लोगों से पांच सौ रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है।
कूड़ा निस्तारण है चुनौती
नगरपालिका भले ही खुले में शौच से मुक्त हो गई हो, लेकिन कूड़ा निस्तारण अभी भी यहां के लिए एक बड़ी चुनौती है। पिछले दो सालों से प्रशासन की सख्ती के बाद सरयू नदी कुछ हद तक ही साफ हो पाई है। पालिका ने गीले और सूखे कूड़े को लेकर कूड़ेदान लगाए हैं। इसके बावजूद लोग कूड़ेदान का प्रयोग नहीं करते हैं। भागीरथी नाले को लोग अब भी प्रदूषित कर रहे हैं। कई लोग सरयू और गोमती के किनारे घरों का कूड़ा-करकट डाल रहे हैं। ईओ ने बताया कि गांधीगिरी से भी लोगों को स्वच्छ बागेश्वर के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्वच्छ ग्रामीण भारत में जिले को मिल चुका है पुरस्कार
स्वच्छ ग्रामीण भारत के तहत शत प्रतिशत शौचालयों का निर्माण करने पर बागेश्वर जिले को देश भर में पहला पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। यह पुरस्कार केंद्र सरकार की ओर से अक्तूबर माह में डीएम को प्रदान किया गया था। इसके तहत बागेश्वर जिले में 17,105 शौचालय बनने थे। लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद जिले को पहले पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।