जिले की स्थापना को 18 साल पूरे हो गए हैं। प्रशासनिक ढांचे के हिसाब से इस अंतराल में जिले ने काफी तरक्की की है।
यहां अधिकतर विभागों के कार्यालय खुल चुके हैं, छह तहसीलें बन चुकी हैं, लेकिन बहुत सी सुविधाओं के लिए यहां के लोग अल्मोड़ा जिला मुख्यालय पर निर्भर हैं।
जिला मुख्यालय पर बढ़ते जनसंख्या दबाव के अनुसार सुविधाओं का अभाव बढ़ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की दिशा में खास काम नहीं हो सका है।
बागेश्वर जिले की मांग को लेकर यहां के लोगों ने लंबा संघर्ष किया। इस दिशा में स्व. गुसांई सिंह दफौटी के त्याग को भुलाया नहीं जा सकता।
पांच सितंबर 1997 को अविभाजित यूपी की मुख्यमंत्री मायावती ने यहां आकर जिले की घोषणा की। 10 दिन के बाद ही नए जिले की स्थापना हो गई।
इसमें अल्मोड़ा जिले की अविभाजित बागेश्वर तहसील को शामिल किया गया। इसका क्षेत्रफल 2246 वर्ग किमी, जनसंख्या 2 लाख, 59 हजार, 898 है।
डीएम और एसपी की नियुक्ति के बाद धीरे-धीरे प्रशासनिक ढांचा खड़ा किया गया। कलक्ट्रेट विकास भवन, पुलिस लाइन सहित निर्माण और विकास से जुड़े विभागों के जिला स्तरीय भवनों का निर्माण हुआ, लेकिन विकास के साथ ही कुछ विसंगतियां पैदा हुई हैं।
नगर पालिका परिषद से लगी ग्रामीण भूमि पर अंधाधुंध, अनियमित निर्माणों के कारण पेयजल, पैदल संपर्क, जल निकासी, स्वच्छता की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसके समाधान की दिशा में कुछ नहीं हुआ है।
बागेश्वर जिला प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक संपन्न है। खड़िया का अकूत भंडार यहां मौजूद है। सरयू, गोमती, पिंडर आदि नदियां, घाटियों में सोना उगलने वाली भूमि, पर्यटन के लिए हिम शृंखलाएं, पौराणिक मंदिर, खूबसूरत ग्लेशियर, हरे भरे बुग्याल, उच्च हिमालय की वन्यसंपदाएं यहां की बेशकीमती धरोहर हैं।
बागेश्वर जिले में उपलब्ध सुविधाएं
प्रशासन और पुलिस का जिला स्तरीय ढांचा
तीन ब्लॉक : बागेश्वर, कपकोट, गरुड़
छह तहसील : बागेश्वर, कपकोट, गरुड़, कांडा, दुग नाकुरी, काफलीगैर
सभी निर्माण एजेंसियों के कार्यालय
शिक्षा, विकास से जुड़े विभागों के कार्यालय
तेजी से फैलता सड़कों का संजाल
बागेश्वर जिले में जो नहीं हो सका
सुविधा संपन्न जिला अस्पताल और बेस अस्पताल
भूतत्व एवं खनिकरण विभाग का कार्यालय
श्रम विभाग, आयकर विभाग के कार्यालय
मनोरंजन कर अधिकारी, खाद्य निरीक्षक
सर्किट हाउस, कर्मचारियों के आवास