बागेश्वर। उत्तराखंड एकता मंच की बैठक में जल, जंगल, जमीन के मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ। बैठक में आगामी 20 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित उत्तराखंड बचाओ, उत्तराखंड बनाओ रैली की सफलता पर भी चर्चा की गई। इससे पूर्व 29 सितंबर से दो अक्तूबर तक गैरसैंण यात्रा का आयोजन किया जाएगा।
शनिवार को होटल नरेंद्रा पैलेस में आयोजित बैठक में दिल्ली से आए विनोद बिष्ट ने कहा कि गठन के डेढ़ दशक बाद भी उत्तराखंड राज्य अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। राज्य में जल, जंगल, जमीन के मुद्दे आज भी जस के तस हैं।
राज्य में संसाधनों की खुली लूट बंद करने, पहाड़ की राजधानी गैरसैंण बनाने, राज्य के शहीदों को उचित न्याय व सम्मान दिया जाय, उत्तराखंडी भाषा, कुमाऊंनी, जौनसारी, गढ़वाली को राजकीय भाषा घोषित किया जाए और उत्तराखंड की पलायनवादी नीतियों के लिए सरकारों की जिम्मेदारी तय करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
वक्ताओं ने कहा कि इन मांगों को लेकर 20 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली निकाली जाएगी। इससे पूर्व 29 सितंबर से दो अक्तूबर तक गैरसैंण यात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसमें गढ़वाल और कुमाऊं के चार-चार जिले शामिल होंगे।
बैठक में राहुल सती, देव सौतियाल, तरुण पंत, गोविंद रावत, सुमित्रा पांडे, जागो उत्तराखंड जागो मुहिम के संस्थापक रमेश पांडे, पूर्व विधायक उमेद सिंह माजिला, वृक्षप्रेमी किशन सिंह मलड़ा, सवाल संगठन के अध्यक्ष गिरीश तिवारी, किरन भट्ट, मनोज कुमार, दीपक जोशी, ईश्वर पांडे आदि मौजूद थे।