बागेश्वर और कपकोट सीट में टिकट बंटवारे के बाद शुरू हुई बगावत भाजपा के लिए मुसीबत बन सकती है। पार्टी और मोर्चा की जिला अध्यक्षों और दो महामंत्रियों के साथ ही लगभग डेढ़ दर्जन पदाधिकारियों के इस्तीफा देने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। यदि दोनों सीटों से नाराज कार्यकर्ता निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतरे तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बागेश्वर की सुरक्षित विधानसभा सीट से सिटिंग विधायक चंदन राम दास को टिकट मिलने के बाद इस्तीफा देने वाली भाजपा की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्षा दीपा आर्या निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ने के लिए अपने समर्थकों के साथ विचार विमर्श कर रही हैं। इस सीट में वह चुनाव मैदान में उतरी तो भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वर्ष 2007 के चुनावों में बागेश्वर सीट में भाजपा के चंदन राम दास, कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा से 5890 मतों के अंतर से जीते थे। 2012 के चुनावों में यह अंतर सिमटकर 1911 पर पहुंच गया।
उधर कपकोट सीट से टिकट नहीं मिलने से नाराज भूपेश उपाध्याय ने प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतरने का एलान किया है। भूपेश अपने समर्थकों के साथ पिछले एक साल से क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे हैं। उनको पूरी कार्यकारिणी के साथ इस्तीफा देने वाली भाजपा की जिलाध्यक्ष उमा बिष्ट का भी समर्थन है। भाजपा ने कपकोट सीट पर पूर्व कैबिनेट मंत्री बलवंत भौर्याल पर भरोसा जताते हुए चुनाव मैदान में उतारा है। कार्यकर्ताओं की बगावत भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। इस सीट में 2012 के चुनावों में पूर्व कैबिनेट मंत्री बलवंत भौर्याल को कांग्रेस के ललित फर्स्वाण से 1339 मतों से हार का सामना करना पड़ा था।