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मुंबई कौतिक में भी छाया रहा बागेश्वर

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मुंबई के कौथिग में प्रस्तुति देते बागेश्वर के कलाकार। - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। नवी मुंबई में प्रवासी उत्तराखंडियों के सामाजिक संगठन कौथिग की ओर से आयोजित किए जा रहे मुबंई कौतिक -2020 में लोक गायक गोविंद दिगारी ने जब बागेश्वर के प्रसिद्ध उत्तरायणी कौतिक पर बने गीत उत्तरायणी कौतिक लागि रौ, सरयू का बगड़ में... की प्रस्तुति दी तो वहां पहुंचे कुमाऊंनी लोगों समेत प्रवासी उत्तराखंडी खूब झूमे।
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नवीं मुंबई में आयोजित मुंबई कौतिक में भाग लेने उत्तराखंड से गढ़वाली, जौनसारी और कुमाऊंनी कलाकारों के कई दल मुंबई पहुंच थे। प्रस्तुति देने गए कुमाऊंनी लोकगायक गोविंद दिगारी ने बताया कि उत्तराखंड में जब हम प्रस्तुति देते हैं, तो दर्शकों की काफी भीड़ उमड़ती है। लेकिन राज्य से बाहर प्रवासी उत्तराखंडियों की कौतिक में उमड़ी भीड़ को देखकर ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हम बाहर प्रस्तुति दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने पहाड़ छुटी गो..., फुलक्या पतोली, रूड़ी का है ला छे ली..., लाली हो लाली हसिया बाना... गानों पर भी प्रस्तुति दी। कौतिक में पारंपरिक परिधानों में उत्तराखंडी महिलाएं, पिथौरागढ़ से आए छलिया कलाकारों ने रंगारंग पथनृत्य प्रस्तुत दी। साथ ही गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकगायकों ने कौथिग के मंच पर लगातार सजने वाली सांस्कृतिक संध्या में रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुति से प्रवासी उत्तराखंड के लोगों समेत देशवासियों का खूब मनोरंजन किया।
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