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Bageshwar News: जिस घर आंगन से मिलने आईं थी उसी में मिल गई बचुली...

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बागेश्वर। पौंसारी गांव में ध्वस्त हुए आवासीय मकान गांव से करीब एक किमी दूर खाईइजर तोक में बने थे। यहां बने दो घरों में केवल दो परिवार रहते थे। एक घर में पति-पत्नी और दो बच्चे जबकि दूसरे घर में मां-बेटा रहते थे। आवासीय मकान दो बरसाती गधेरों के बीच बने थे। अतिवृष्टि में दोनों गधेरों में पानी बढ़ गया। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा बहकर आया और घरों का नामोनिशान मिटा गया। जिस जगह पर दो परिवार बसते थे अब वहां बचे अवशेष बर्बादी की कहानी बयां कर रहे हैं।



घटना में जान गंवाने वाली बसंती देवी (42) की बहन पोखरी गांव निवासी गीता देवी ने बताया कि उनकी बहन के परिवार की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। पति-पत्नी खेतीबाड़ी, पशुपालन से आजीविका चलाकर बच्चों का पालन पोषण करते थे। बड़ा बेटा गणेश (गौरव) जोशी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है।
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14 वर्षीय मझला बेटा पवन और गिरीश (10) गांव के स्कूल में पढ़ाई करते थे। पहले यहां रमेश चंद्र (49) का परिवार अकेले रहता था। करीब एक साल पहले बसंती देवी की जेठानी बचुली देवी (65) भी अपने बेटे पूरन चंद्र जोशी (42) के साथ हल्द्वानी से गांव आ गई थीं। बताया कि बचुली देवी के पति पुरुषोत्तम का कई साल पहले निधन हो गया था। उनके दो बेटे हल्द्वानी में ही रहते हैं। जिस बेटे के साथ वह गांव में रहती थीं वह मानसिक रूप से कमजोर थे। दोनों परिवार मेहनत-मजदूरी कर जीवन-यापन कर रहे थे।

बृहस्पतिवार की रात दोनों परिवार प्रकृति की भयावहता के शिकार बन गए। तीन लोगों को अब तक खोजा नहीं जा सका है। घटना के बाद गणेश दिल्ली से गांव के लिए रवाना हो चुका है। बचुली देवी के परिजन भी आज पहुंच सकते हैं। संवाद





मेरा दोस्त चला गया, उसकी याद आ रही है.....







बागेश्वर। गिरीश मेरा सबसे अच्छा दोस्त था। वह पौंसारी से बैसानी पढ़ने आता था, हम साथ में रहते थे। एक साथ खेलते थे। खूब बातें करते थे। अब वो चला गया। कभी मुझसे मिलने नहीं आएगा। ये शब्द हैं मासूम कमल किशोर के जो अपने दोस्त गिरीश के लापता होने से काफी मायूस था।

बैसानी निवासी कमल ने बताया कि वह दोनों एक साथ कक्षा पांच में पढ़ते थे। गिरीश पढ़ने के लिए पौंसारी से रोज बैसानी आता था। वह करीब चार किमी पैदल दूरी तय करके यहां पहुंचता था। शुक्रवार को जब यह घटना घटी तो कमल अपने दोस्त का हालचाल जानने के लिए चार किमी दूर पौंसारी गांव पहुंच गया। कमल ने बताया कि गिरीश दुबला-पतला था। वह शरारत तो नहीं करता था लेकिन बातें खूब करता था। आंखों में आंसू और मुरझाए चेहरे के साथ कमल का यह कहना कि जाने वाला चला गया, वहां मौजूद कई लोगों की आंखें नम कर गया।
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पौंसारी से लौटने के बाद वह मासूम बच्चा रेस्क्यू सेंटर में भी रात तक जमा रहा। इस दौरान विधायक सुरेश गढि़या ने उसे अपने पास बैठाया। वहां मौजूद लोग उस दुखी बच्चे को देखकर दोस्ती के रिश्ते पर चर्चा करते रहे। संवाद








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