कपकोट(बागेश्वर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कुत्तों, कटखने बंदरों और अन्य जानवरों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले चार माह में ऐसे 167 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक मामले कुत्तों के काटने के हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी पीड़ितों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार रैबीजरोधी टीके लगाए जा रहे हैं।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. अनुभा ने बताया कि जानवरों के काटने के बाद मरीजों को विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार रैबीजरोधी टीके लगाए जाते हैं। मरीज की स्थिति और निर्धारित शेड्यूल के अनुसार तीन से पांच टीके लगाए जाते हैं। अस्पताल में रैबीजरोधी टीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और नियमित रूप से मरीजों को लगाए जा रहे हैं।
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महीना कुत्ते बंदर बिल्ली
मई 20 15 4
जून 53 14 0
जुलाई 35 5 1
अगस्त 12 6 2
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कोट
कुत्ते या बंदर समेत किसी भी जानवर के काटने पर घाव को तत्काल साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोकर बिना देरी किए अस्पताल पहुंचें। समय पर उपचार और टीकाकरण से रैबीज के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर