बागेश्वर। मणिपुर में मातृभूमि की रक्षा करते हुए असम राइफल्स के वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल (वीर सपूत) शहीद हो गए हैं। उनके सर्वोच्च बलिदान की खबर मिलते ही जनपद के भाटनीकोट ग्राम पंचायत अंतर्गत उनके पैतृक गांव बनडुंगरा सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। बुधवार तड़के ही काफी संख्या में ग्रामीण शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए हल्द्वानी रवाना हो गए।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार शहीद वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह खेतवाल का पार्थिव शरीर उनके वर्तमान निवास स्थान हल्द्वानी लाया जा रहा है। देश के इस वीर सपूत का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ हल्द्वानी में ही किया जाएगा। अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए उनके पैतृक गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण, सगे-संबंधी और क्षेत्रवासी हल्द्वानी पहुंच चुके हैं।
माटी से हमेशा रहा जुड़ाव, युवाओं के चहेते थे बलवंत
ग्रामीणों के अनुसार बच्चों की उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए बलवंत सिंह का परिवार कुछ समय पूर्व हल्द्वानी शिफ्ट हो गया था लेकिन उनका अपनी माटी से गहरा जुड़ाव बना रहा। सेना में भर्ती होने के बाद भी वे लंबे समय तक गांव में ही रहे। उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज तुपेड़ से पूरी की थी।
ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष दीपक सिंह खेतवाल ने उनके बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि बलवंत बचपन से ही मिलनसार और खेलकूद में अग्रणी थे। उन्हें क्रिकेट का बेहद शौक था और वे स्थानीय युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनके भीतर देश सेवा का जज्बा हमेशा से कूट-कूट कर भरा था।
आज भी सड़क से महरूम है बलिदानी का गांव, ग्रामीणों ने उठाई मांग
भाटनीकोट के ग्राम प्रधान संतोष खेतवाल ने वीर सपूत के बलिदान पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शासन-प्रशासन के समक्ष क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को उठाया है। उन्होंने बताया कि भाटनीकोट ग्राम पंचायत के तहत आने वाले बनडुंगरा तोक में 25 परिवार, कभड़ेत में 17 परिवार और रैखालागांव तोक में 27 परिवार आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के इंतजार में हैं। ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए लगभग एक किलोमीटर की खड़ी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।
शहीद के नाम पर हो मार्ग का नामकरण....
जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल ने मांग उठाई है कि जब गांव के लाडले ने देश की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है तो सरकार को अविलंब इस तोक को सड़क मार्ग से जोड़ना चाहिए। साथ ही, इस मार्ग का नाम शहीद बलवंत सिंह खेतवाल मार्ग रखा जाना चाहिए। यही इस वीर सपूत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।