बागेश्वर। जिले की जलवायु अब आम, आड़ू के बाद सेब को भी रास आने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सेब की विभिन्न प्रजातियों का उत्पादन हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों के साथ अपेक्षाकृत गर्म समझे जाने वाले क्षेत्रों में भी हाइब्रिड किस्म के सेब की अच्छी पैदावार हो रही है। जिले में पहली बार 90 क्विंटल सेब का उत्पादन हुआ है। अब भी करीब 10 क्विंटल तक सेब की तुड़ाई होनी बाकी है।
वर्तमान में जिले के विभिन्न स्थानों पर किसान सेब की एम नाइन और एम 111 प्रजाति की रूट स्ट्रोक आधारित बागवानी कर उत्पादन कर रहे हैं। इसके तहत 1300 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले स्थानों पर किंग रोट, गेल गाला, रेड लम गाला, जैरो माइन, ग्रेविस स्मिथ प्रजाति के सेब का उत्पादन हो रहा है। 1300 मीटर से कम ऊंचाई वाले बमराड़ी में हरमन 99 प्रजाति का उत्पादन हो रहा है। इस सेब की बाजार में कीमत 200-250 रुपये प्रति किलोग्राम है।
वर्तमान में बागेश्वर तहसील के सात रतबे, बमराड़ी, गरुड़ के कौसानी, कपकोट के झूनी-खलझूनी, बघर, पिंडर घाटी, बड़ी पन्याली और काफलीगैर के पंतगांव, बांजगांव में सेब की पैदावार हो रही है। पांच साल पहले तक सिर्फ कपकोट के ऊंचाई वाले इलाकों में ही सेब की पैदावार होती थी। पिछले साल जिले में सेब का उत्पादन 30-35 क्विंटल रहा।
इस वर्ष सात रतबे में किसान दरबान सिंह परिहार के बागानों में अच्छी पैदावार होने से उत्पादन में 55 से फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। जिले में सेब का उत्पादन बढ़ने से उद्यान विभाग और किसान खासे उत्साहित हैं।
नए बगीचा लगाएं, उद्यान विभाग करेगा मदद
इच्छुक किसान सेब के नए बगीचे लगाने के लिए उद्यान विभाग में आवेदन कर सकते हैं। विभाग की ओर से पांच से 20 नाली की भूमि पर 60 फीसदी अनुदान पर बगीचे लगाने की योजना चल रही है। इसके तहत किसानों की भूमि का जलवायु परीक्षण कर उनके सेब के बगीचे तैयार किए जाते हैं। कुलदीप जोशी, वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक, बागेश्वर
कोट
जिले में सेब के उत्पादन की अभी शुरूआती प्रयास हैं जिसमें विभाग को सफलता मिल रही है। आगे भी जिले में सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में छोटे किसानों को भी निशुल्क पौधे वितरित कर योजना से लाभांवित किया जाएगा। बड़े बगीचे लगाने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। - हरीश राम आर्या, जिला उद्यान अधिकारी, बागेश्वर