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कपकोट में क्रमिक अनशन पांचवें दिन भी जारी

Sun, 14 Aug 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कपकोट (बागेश्वर)।
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कपकोट में अनशन - फोटो : अमर उजाला
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कपकोट (बागेश्वर)। यहां चल रहा ग्रामीणों का क्रमिक अनशन शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। सभा में ग्रामीणों ने पोथिंग, तोली गांव की समस्याएं सुलझाने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पीपीपी मोड से हटाकर बेस अस्पताल बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेेतावनी दी गई।
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दोनों अनशन तहसील प्रांगण में चल रहे हैं। जहां उत्तराखंड जनचेतना मंच के बैनर तले पोथिंग गांव की 14 समस्याओं को लेकर पूर्व में समझौतों को लागू करने की मांग को लेकर रतन राम, शेर राम, विशन राम क्रमिक अनशन पर बैठे। मंच के अध्यक्ष हरीश चंद्र जोशी ने अध्यक्षता, संचालन नरेंद्र सिंह गढ़िया ने किया।

तोली गांव को सड़क से जोड़ने समेत अन्य मांगों को लेेकर गोपुली देवी, तारा देवी क्रमिक अनशन पर बैठी। इसी परिसर के तीसरे हिस्से में सर्वदलीय संघर्ष समिति के बैनर तले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पीपीपी मोड से हटाने की मांग को लेकर करम सिंह दानू, मुन्ना जोशी क्रमिक अनशन पर बैठे।
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समिति के अध्यक्ष गिरीश जोशी ने अध्यक्षता की। वहां कैलाश जोशी, उम्मेद सिंह, धन सिंह आदि थे। सभाओं में वक्ताओं ने लक्ष्य प्राप्त न होने तक आंदोलन की धार कमजोर न होने देने का अपना संकल्प दोहराया।

कपकोट (बागेश्वर)। पोथिंग की बीडीसी सदस्य शोभा गढ़िया ने ग्राम प्रधान द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की है। जिला प्रशासन को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि मनरेगा, राज्य वित्त, 13वां वित्त, 14वें वित्त समेत अन्य मदों से कराए गए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार हुआ है।

उन्होंने कहा कि छह महीने पहले हुए आंदोलन के दौरान गांव की समस्याओं को लेकर विधायक ललित फर्स्वाण ने सभी मांगों पर अपनी सहमति जता दी थी। जिन पर अब काम ही शुरू होना ही था कि फिर से तहसील मुुुख्यालय पर आंदोलन शुरू कर दिया गया।

साथ ही कुछ लोगों ने आंदोलनस्थल पर विधायक के साथ अभद्रता कर गांव की छवि खराब करने की भी कोशिश की। उन्होंने प्रशासन से गांव में हुए सभी विकास कार्यों की शीघ्र जांच कराने की मांग की है ताकि असलियत सबके सामने आ सके। शीघ्र जांच न होने पर उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से आंदोलन की चेेतावनी दी है। वहीं ग्राम प्रधान चंपा देवी ने आरोपों को निराधार बताया। कहा कि पहले भी विकास योजनाओं की जांच हो चुकी है। इसमें वह बेदाग साबित हुई हैं।
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