अनर्सा में शराब की दुकान खुलवाने गई पुलिस और प्रशासनिक टीम की महिलाओं की जिद के आगे एक नहीं चली। टीम को बैरंग लौटना पड़ा। गुस्साईं महिलाओं ने दो टूक कहा-भले ही जेल क्यों न जाना पड़े, लेकिन वह शराब की दुकान नहीं खुलने देंगी।
अनर्सा समेत आस-पास के गांवाें की महिलाओं और ग्रामीणों के आंदोलन के बूते अनर्सा में आवंटित देशी शराब की दुकान आज तक नहीं खुल सकी है। लाइसेंसधारी नरेंद्र सिंह के प्रशासन से कई बार दुकान खुलवाने की गुहार लगा चुका है।
आर्थिक नुकसान को आधार बनाते हुए नरेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो कोर्ट ने डीएम को निर्णय लेने को कहा और जरूरत पड़ने पर दुकान खुलवाने के लिए पुलिस बल तैनात करने का फैसला सुनाया। आदेश का पालन कराने के लिए प्रशासन की कोशिश दो दिन से जारी हैं।
शुक्रवार को एक बार फिर एडीएम हरबीर सिंह, प्रभारी एसपी धनी राम, एसडीएम फिंचाराम चौहान दल-बल के साथ अनर्सा की दुकान खुलवाने के लिए दमगाड़ पहुंचे। उनके साथ दुकान के लाइसेंसधारक भी थे। लेकिन टीम ने जैसे ही दुकान का ताला खुलवाने का प्रयास किया, ग्राम प्रधान गीता देवी, महिला मंगल दल की अध्यक्ष आशा देवी के नेतृत्व में महिलाएं वहां पहुंच गईं।
एडीएम ने महिलाआें को समझाया कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुपालन में दुकान हर हाल में खुलनी है। इसके लिए उन्होंने सभी से सहयोग की अपील की, लेकिन महिलाएं अपनी बात पर अड़ी रहीं। बाद में दुकान के तालों में सील लगाकर पुलिस और प्रशासनिक अफसर जिला मुख्यालय लौट आए।
विरोध करने वालोें में मधुली, बसंती, हेमा, नीमा, कौशल्या देवी चंपा देवी, खिमुली देवी, अनीता देवी, हेमा, कला, पुष्पा, चंपा रेबुली आदि शामिल थी। इधर देवलचौंरा के ग्राम प्रधान महेश कुमार ने भी साफ कहा कि अगर प्रशासन ने उनकी ग्राम पंचायत में शराब की दुकान शिफ्ट करने की कोशिश की तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।