बागेश्वर। साल 2021 में परिसर का दर्जा मिलने के बाद पंडित बीडी पांडेय परिसर में तीन बार छात्रसंघ चुनाव हुए। बीते कई सालों से कॉलेज में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज करने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) परिसर बनने के बाद चुनावी रणनीति में असफल नजर आ रही है। परिसर बनने के बाद वर्ष 2022 के छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी के प्रत्याशी आशीष कुमार ने 413 मतों के अंतर से नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रकाश सिंह को हराया। वर्ष 2023 और 2025 में एबीवीपी को एनएसयूआई से करारी हार का सामना करना पड़ा।
पंडित बीडी पांडेय परिसर वर्ष 2021 से पहले महाविद्यालय था। इस दौरान महाविद्यालय में साल 2010 से वर्ष 2014 तक लगातार अध्यक्ष पद पर एबीवीपी की जीत हुई। वर्ष 2014 के छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई ने वापसी की लेकिन साल 2015 और 2016 में एबीवीपी की जीत हुई। वर्ष 2017 में एबीवीपी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले कौशल उपाध्याय ने जीत दर्ज की।
2018 में निर्दलीय प्रत्याशी शशांक वर्धन ने जीत दर्ज की। इसके बाद एबीवीपी ने रणनीति मजबूत कर एक बार फिर से वापसी की। 2019 में एबीवीपी के सौरभ जोशी और परिसर बनने के बाद साल 2022 में आशीष कुमार ने जीत दर्ज की। तब से एबीवीपी को लगातार दो बार के चुनाव में अध्यक्ष पद पर हार का सामना करना पड़ा है।
वर्ष 2023 में एनएसयूआई के राहुल कुमार ने एबीवीपी के खजान टंगड़िया को हराकर जीत दर्ज की। साल 2025 में एबीवीपी के प्रत्याशी घोषणा के बाद टिकट का इंतजार कर रहे पंकज कुमार का टिकट कटने से वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। जिससे अध्यक्ष पर हुए त्रिकोणीय मुकाबले में एबीवीपी तीसरे नंबर पर रही। एनएसयूआई के सागर जोशी ने अध्यक्ष का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी पंकज से 80 मतों के अंतर से जीत लिया। संवाद
पूरे जिले में एक पद पर चुनाव और पांच पदों पर निर्विरोध जीते एबीवीपी कार्यकर्ता
बागेश्वर के पंडित बीडी पांडेय परिसर में विवि प्रतिनिधि पद पर निर्विरोध निर्वाचित दिपांशु आर्या ने एबीवीपी को अपना समर्थन दिया है। राजकीय महाविद्यालय गरुड़ में एबीवीपी समर्थित विवि प्रतिनिधि शिवानी भाकुनी, उपाध्यक्ष कविता, छात्रा उपाध्यक्ष ज्योति जीना, सांस्कृतिक सचिव शीतल पंत निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। कोषाध्यक्ष पद पर संगठन के नितिन सिंह भयेड़ा ने 16 मतों से जीत दर्ज की है। पंडित बीडी पांडेय परिसर में एबीवीपी के खाते में महज विवि प्रतिनिधि ही निर्विरोध निर्वाचित होकर आए। संगठन से अध्यक्ष पद के दो दावेदार होने से एबीवीपी का खेल बिगड़ गया। संगठन के प्रत्याशी का तीसरे नंबर पर रहना भीतरघात का प्रमाण है।
एनएसयूआई की कुशल रणनीति से सागर अध्यक्ष और ललित बने सचिव
बागेश्वर में एनएसयूआई की छात्रसंघ चुनाव में मजबूत रणनीति फिर कारगर साबित हुई है। जिस तरह एबीवीपी में टिकट के दो दावेदार थे। उसी प्रकार एनएसयूआई में भी सागर जोशी और ललित कुमार अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी कर रहे थे। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष कमलेश गढि़या ने बताया कि संगठन के सभी पदाधिकारियों ने दोनों प्रत्याशियों के साथ आपस में बैठक कर सागर को अध्यक्ष और ललित को सचिव पद का प्रत्याशी घोषित किया। इसमें सागर अध्यक्ष पद पर चुनाव जीते और ललित निर्विरोध सचिव निर्वाचित हुए। एबीवीपी में प्रत्याशी घोषणा के दिन से ही बगावती सुर उठने लगे जिसने संगठन के प्रत्याशी का खेल बिगाड़ दिया। इसके अतिरिक्त एनएसयूआई ने कांडा, गरुड़ महाविद्यालयों में अध्यक्ष के पद पर और कपकोट में अन्य पदों पर अपना परचम लहराया है।
निर्दलीय प्रत्याशी एनएसयूआई पर पड़ा भारी
बागेश्वर जिले के परिसर समेत तीन कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर परचम लहराने वाली एनएसयूआई की रणनीति कपकोट में विफल रही। छात्रसंघ चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मुकुल शाही ने अपने पद इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की। एबीवीपी ने कपकोट में कोई प्रत्याशी मैदान में उतारा। निर्दलीय प्रत्याशी मुकुल ने एनएसयूआई के पवन बिष्ट को कांटेदार मुकाबले में सात मतों से हराया।