बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश सुबीर कुमार की अदालत ने पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज मामले में आरोपी कमल कुमार को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाने के आधार पर यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार 30 नवंबर 2025 को 15 वर्षीय किशोरी अपने भाई का छात्रवृत्ति फॉर्म भरने भराड़ी गई थी। लौटते समय चीराबगड़ पुल के पास बोरबलड़ा, बदियाकोट निवासी कमल कुमार पर उसके साथ छेड़छाड़ करने और दुष्कर्म का प्रयास करने का आरोप लगाया गया था। प्राथमिकी के अनुसार, विरोध के दौरान किशोरी ने आरोपी के सिर पर पत्थर से वार किया और परिजनों को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में दिए बयान में आरोपी पर किसी तरह की अश्लील हरकत या छेड़छाड़ करने से इन्कार किया। उसने कहा कि पूर्व में मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान पुलिस के कहने पर दिए थे। पीड़िता के माता-पिता ने भी अदालत में कहा कि उन्होंने गांव वालों के बहकावे में आकर थाने में तहरीर दी थी। अभियोजन के कथानक का समर्थन नहीं करने पर अदालत ने पीड़िता और उसके माता-पिता को पक्षद्रोही घोषित किया।
मामले में चिकित्सक ने पीड़िता के शरीर पर चोट और खरोंच के निशान होने की पुष्टि की थी। हालांकि अदालत ने माना कि जब पीड़िता और उसके माता-पिता ने घटना के आरोपों का समर्थन नहीं किया और आरोपी की ओर से चोट पहुंचाए जाने की पुष्टि नहीं हुई तो केवल चिकित्सीय रिपोर्ट के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसके बाद कमल कुमार को पॉक्सो अधिनियम और बीएनएस के तहत लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया।