बागेश्वर। रीमा क्षेत्र के उडियार गांव की शिखर माइन में खनन के दौरान 18 मार्च को मलबा गिरने से दो मजदूरों के घायल और एक मजदूर के बेहोश होने के मामले में चार दिन बाद भी प्रशासन की जांच आगे नहीं बढ़ी है। घटना की सूचना प्रशासन तो उसी दिन मिल गई थी। इसके बावजूद घायल मजदूर अब कहां और किस हाल में हैं? घटना के चौथे दिन तक प्रशासन को इसका पता नहीं है।
इस घटना में पत्थर की चपेट में आकर जारती (बागेश्वर) निवासी मजदूर नंदन राम (57) पुत्र किटर राम और लखीमपुर खीरी दुखी राम (45) घायल हुए थे जबकि घटना को देख लखीमपुर खीरी निवासी शिव प्रताप (26) पुत्र दुखी राम घबराकर बेहोश हो गया था। आरोप है कि खदान संचालक ने पुलिस, प्रशासन को घटना की सूचना नहीं दी। रीमा पुलिस चौकी प्रभारी संजय बृजवाल के मौके पर पहुंचने तक घायलों को हल्द्वानी ले जाया जा चुका था। रास्ते में किसी निजी अस्पताल में घायलों के प्राथमिक उपचार की सूचना भी प्रशासन को मिली थी। बाद में मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर हर गिरि ने खदान में काम बंद करा दिया था। डीएम अनुराधा पाल ने मामले की जांच कराने की बात कही थी।
घायलों को सरकारी अस्पताल मेें न ले जाने पर उठे सवाल
बागेश्वर। घटना के दिन किसी मजदूर की मौत होने तक की अफवाह थी। तब एसडीएम ने भी मौत की बात नकारी थी लेकिन घायल मजदूरों का इलाज स्थानीय सरकारी अस्पताल में कराने के बजाय दूर ले जाने और जांच आगे न बढ़ने पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि घायलों को सरकारी अस्पतालों में ले जाने पर वहां उनका रिकाॅर्ड दर्ज हो जाता। हालांकि तीन मजदूरों का सत्यापन न कराने पर घटना के दिन पुलिस ने खदान संचालक पर दस हजार रुपये का जुर्माना ठोका था।
खान स्वामी को एसडीएम ने किया तलब
बागेश्वर। घटना की जांच और घायलों की स्थिति के बारे में पूछने पर एसडीएम सदर हर गिरि ने अनभिज्ञता जताई। एसडीएम ने बताया कि जांच के लिए शिखर माइन के स्वामी दीवान सिंह पपोला को तलब किया गया है। उनका पक्ष जानने के बाद जांच आगे बढ़ सकेगी।