अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित विवेक मडुवा थ्रेशर काश्तकारों के लिए उपयोगी है। थ्रेशर से एक घंटे में 60 से 80 किलो मडुवा की मड़ाई की जा सकती है। हाथ से इतना काम करने में ग्रामीणों का एक दिन तक लग जाता है। करीब 45 किलो वजन की इस मशीन को काश्तकार खरीदने के बाद आसानी से दूर गांव तक ले जा सकते हैं। इसकी कीमत 12 हजार 800 रुपए और उत्तराखंड में कृषि विभाग इस मशीन को खरीदने में 50 प्रतिशत अनुदान दे रहा है।
उत्तराखंड में 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मुडवा की खेती होती है। कदन्न फसलों में शामिल मडुवा की खेती सरल और टिकाऊ है। इनके दाने छिलकों में बहुत दबे होने के कारण मड़ाई करने में श्रम और समय दोनों अधिक लगता है। सामान्यत: पर्वतीय क्षेत्र में मडुवा की बालियों को डंडे से पीटकर अथवा बालियों के ऊपर बैलों को गोलाकार में चलाकर (दै) मड़ाई की जाती है। कुछ स्थानों पर काश्तकार पैरों से भी मड़ाई करते हैं। जिसमें काफी श्रम लगता है।
काश्तकारों के श्रम को कम करने के लिए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने विवेक मडुवा थ्रेशर को 2005 में तैयार किया। यह बिजली और इंजन दोनों से चलता है। थ्रेशर की लंबाई एक मीटर, चौड़ाई 59 सेमी, ऊंचाई 1.33 मीटर है। मशीन से मडुवा की मड़ाई की क्षमता 60 से 80 किलो प्रति घंटा तक है। पंजाब एग्रीकल्चर इक्यूपमेंट रेलवे रोड सहारनपुर इस मशीन का व्यवसायिक उत्पादन कर रहा है। अब तक देश में करीब 800 मशीनों बेचा गया है। इसमें से चार सौ मशीनें उत्तराखंड के काश्तकारों ने खरीदी हैं। थ्रेशर का बाजार मूल्य 12,800 रुपए के करीब है। यदि काश्तकार इसे कृषि विभाग के माध्यम से खरीदते हैं तो उन्हें यह मात्र 6,400 रुपये में उपलब्ध हो जाता है।