बागेश्वर। सरकार पंचायतों के सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें तो करती है, लेकिन सच्चाई यह है कि जिले में 47 ग्राम पंचायतों के पास अपने पंचायत घर तक नहीं हैं। स्थिति यह है कि ग्राम प्रधानों को अपने घरों में मासिक बैठकें बुलानी पड़ रही हैं। खुले बैठकें खुले आसमान के नीचे हो रही हैं। जबकि पंचायतों के रिकार्डों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। पंचायत घरों के निर्माण के लिए कई बार ग्राम प्रधानों ने कहा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिले में कुल 416 ग्राम पंचायत हैं। बागेश्वर ब्लाक में 192, कपकोट में 118 और गरुड़ ब्लाक में 106 ग्राम पंचायत हैं। इनमें से 47 ग्राम पंचायतों में लंबे समय से पंचायत भवन नहीं हैं। भवनों का निर्माण न होने के कारण ग्राम प्रधानों को पंचायतों का कामकाज निपटाने में परेशानी हो रही है। पंचायत भवन न होने से संबंधित ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों को मनरेगा, राज्य, 13वां वित्त, विधायक निधि समेत कई अन्य विकास योजनाओं के दस्तावेजों को तैयार करने में परेशानी हो रही है।
यहां नहीं हैं पंचायत भवन
नरगोली, पल्सों, जनौटीपालड़ी, बोरगांव, छातीखेत, भटखोला, बंग्चूड़ी, बिलौरी, नौगांव द्वितीय, मंगरूपहरी, सिमतोली द्वितीय, बेदीबगड़, कांडे, मंतोली, पंक्चौड़ा, तुनेड़ा, ढपटी, बोहाला, रेैखोली, असों, सिया, पगना, धपोलासेरा, कपकोट, काफलीगैर, किस्मिला, भयूं, किमू, महरूड़ी, हाम्टीकापड़ी, फरसाली पल्ली, हरसीला, दियाली कुरौली, कालापैर कापड़ी, नान कन्यालीकोट, लीती, लीली, असों, नौघर, रतमटिया, जिजोली, थान डंगोली, तिलसारी, उड़खुली, चनौली, अयारतोली और कौसानी।
शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं : डीपीआरओ
जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह ने बताया कि इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी पंचायती सशक्तिकरण अभियान के तहत बजट मिलने पर भवनों का निर्माण शुरू होगा। बजट मिलने पर ही संबंधित ग्राम पंचायतों से प्रस्ताव मंगाए जाएंगे। इसके लिए दो नाली भूमि की आवश्यकता होगी।