बागेश्वर। सुरक्षा के शीघ्र पुख्ता इंतजाम नहीं हुए तो जिले के 123 प्राथमिक पाठशालाएं और जूनियर हाईस्कूल भवन कभी भी सुमगढ़ हादसा दोहरा सकते हैं। जर्जर हालत में खडे़ भवनों की कायापलट और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से वहां नौनिहालों की जिंदगी खतरे में है। वर्षों पूर्व निर्मित इन भवनों की हालत बद से बदत्तर होने के कारण अभिभावक बच्चों को इन स्कूलों में भेजने से डर रहे हैं। ग्रामीणों ने शासन और शिक्षा विभाग से भवनों का पुर्ननिर्माण और सुरक्षा के शीघ्र ठोस कदम उठाने को कहा है। मालूम हो कि 18 अगस्त 2010 को भीषण बारिश से सुमगढ़ में पहाड़ी खिसकने से सरस्वती शिशु मंदिर के 18 बच्चे जिंदा दफन हो गए थे। लोगों को विश्वास था कि शासन प्रशासन इस बड़े हादसे से जल्दी ही सबक लेगा। लेकिन आज तक जीर्णशीर्ण पाठशाला भवनों की दशा सुधारने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के कोई भी उपाय नहीं किए गए हैं। शासन और प्रशासन की अनदेखी से जिले के 123 पाठशालाएं और जूनियर हाईस्कूल बाढ़ भूस्खलन की दृष्टि से खतरे की जद में हैं। दुर्भाग्य से यदि कोई अनहोनी हो गई तो बड़ा हादसा होने से कोई नहीं रोक पाएगा। दैवीय आपदा के मुहाने वाले विद्यालय बागेश्वर ब्लाक में कुल 35 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक पाठशालाएं खतरे की जद में हैं। इनमें प्राथमिक पाठशाला पोखरी, चौंरा, खोलीगांव, पालड़ीछीना, कनगाड़, धपोलासेरा, दिगोली, बसेत, जल्थाकोट, चामी, बसेत, सिया और जूनियर हाईस्कूल जैनकरास आदि शामिल हैं। कपकोट ब्लाक में सर्वाधिक 60 प्राथमिक पाठशालाओं में से बघर, तल्ला खोला कर्मी, शामा, पन्याली, जड़बिला, कालापैर कापड़ी, पालनाधुरा, लाथी, खलझूनी उनू, मिकिला, लाहुर, बदियाकोट, पटाख, डौला, खाती और उमला शामिल हैं। गरुड़ ब्लाक के 28 पाठशालाओं में बंतोली, रणकुड़ी, खिलाफख्ेत, लछियाबगड़, सेलकूना, लखनी, अमस्यारी, बज्वाड़, पय्या वल्ला, रैतोली और जूनियर हाईस्कूल सिमगड़ी, ह्वील कुलवान, सिमगड़ी, मालदे और मटेना के भवनों की हालत खस्ता है।