कौसानी (बागेश्वर)। कुर्मांचल के गांव-गांव में भादों महीने में सातूं आठूं का लोक पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। बागेश्वर और अल्मोड़ा की सीमा पर बसे छानी ल्वेशाल गांव के लोग इस पर्व को वर्ष 1711 से मनाते आ रहे हैं। पूजा का आयोजन मुख्य रूप से दोसाद बिरादरी करती है। जिसमें गांव के सभी लोग श्रद्धाभाव से बढ़चढ़कर शामिल होते हैं। इसी गांव में नंदाराज यात्रा का पड़ाव भी है। गांव के ही जगरिए नंदा देवी मंदिर अल्मोड़ा में हर वर्ष लगने वाले नंदादेवी मेले में ननौल गाने के लिए जाते हैं।
ग्राम पंचायत छानी में एक साल छानी तो दूसरे साल ल्वेशाल में सातूं आंठू का पर्व मनाया जाता है। गांव के बुर्जुग गुंसाई सिंह दोसाद बताते हैं गढ़वाल के बांण गांव के श्री श्री 1008 लाटू देव विराजे हैं। इसी मंदिर में इस पर्व का आयोजन होता है। आठ दिन तक चलने वाले इस पर्व में देव डांगर ल्वेशाल गांव से नंदा और पार्वती की मूर्ति के निर्माण के लिए केले का वृक्ष लाते हैं। पेड़ का तना काटकर पूरे विधि विधान से मूर्तियों का निर्माण किया जाता है। लाटू देवता को आमंत्रित करके मूर्तियों को वहां स्थापित किया जाता है।
आठ दिन तक माता की तांत्रिक विधि से पूजा की जाती है। नौवें दिन मूर्तियों को विसर्जित कर दिया जाता है दसवेें दिन मंदिर में जोरदार का भंडारा होता है। पूजा को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह रहता है। प्रवासी भी घर आते हैं। जगरिए न्योती बुलौल भूमि का भुम्याल...,न्यौती बुलौल मिशूली मांई उ बांण लाटू..., सब गण तुमूलै ए जांण देव थलम...यानी सबसे पहले भूमि के देवता को निमंत्रण है। इसके बाद नंदा पार्वती और लाटू देवता समेत सभी देवता आमंत्रित हैं। विदाई पर जगरिए अपने गायन में कहते हैं सब दोसाद भाई लै नंदू माई की सेवा सत्कार करी, स्यौनी में तेल माखन लगाया...रास्ते का कलेवा रख हिम आंचल को विदा करूं ल...यानी दोसाद भाईयों ने नंदा पार्वती की खूब सेवा की, सिर में मक्खन रखा और मायका जाने के लिए रास्ते का कलेवा भी रखा है। इसके बाद वह पूजा में शामिल लोगों को आशीर्वाद देेकर नंदा भगवती हिमालय के लिए विदा हो जाती हैं।
भंडारा 28 को
कौसानी (बागेश्वर)। छानी-ल्वेशाल गांव में आयोजित सातूं आठूं पर्व की धूम मची है। गांव में 27 अगस्त की रात जागरण होगा और दूसरे दिन भंडारे का आयोजन होगा। गुंसाई सिंह दोसाद ने लोगों से भंडारे में बढ़ चढ़कर शामिल होने की अपील की है।