बागेश्वर। सैनिकों की शहादत के बाद सरकारें राहत के नाम पर लंबे चौड़े दावे तो करती है। लेकिन, उन्हें पूरा करने के लिए ठोस व गंभीर प्रयास नहीं किए जाते हैं। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में शहीद हुए मोहन सिंह दानू के गांव को सड़क से जोड़े की घोषणा बीस साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है।
शहीद मोहन सिंह दानू दिसंबर 1990 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी शिक्षा गांव में ही हुई थी। सात जुलाई 1999 में वह कारगिल में शहीद हो गए। शहीद मोहन सिंह अपने पीछे पत्नी सहित उमा देवी, दो बच्चे सहित पिता हिम्मत सिंह दानू व माता जीवंती का भरा पूरा परिवार छोड़ गए थे। शहीद के परिवार ने गांव वालों के साथ मिलकर गांव तक सड़क लाने का काफी प्रयास किया मगर सफलता नहीं मिली। वर्तमान में शहीद का परिवार गांव छोड़कर हल्द्वानी बस गया है। शहीद के परिवार ने गांव में अस्पताल खोलने पर पांच नाली भूमि निशुल्क देने की बात कही थी। लेकिन सरकार ने गांव में अस्पताल खोलने का प्रयास नहीं किया। शहीद के परिजनों की मांग है कि मोहन सिंह के नाम पर गांव में अस्पताल खोला जाए। इधर एडीएम राहुल गोयल ने कहा कि शहीदों व उनके परिवार का पूरा सम्मान है। घोषणाओं के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। शहीद के चाचा बलवंत सिंह बताते हैं कि शहीद के नाम पर हुई घोषणा पूरी नहीं हो सकी हैं
भू धंसाव से खतरे की जद में दोबाड़ गांव
कर्मी क्षेत्र के दोबाड़ गांव में विगत कई सालों से लगातार हो रहे भू धंसाव के चलते परिवारों में खतरा मंडरा रहा है। खेतों व मकानों में दरार के चलते गांव में खतरा बना हुआ है। गांव में खतरे को देखते हुए कई परिवार पलायन भी कर चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शासन प्रशासन को सूचित करने के बाद भी भू धंसाव रोकने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
कर्मी सड़क का नामकरण भी नहीं हुआ
शहादत के बाद तत्कालीन सरकार ने कपकोट-कर्मी मोटर मार्ग का नाम शहीद मोहन सिंह दानू के नाम करने की घोषणा की थी जिसे अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। गांव के लोग बताते हैं कि इस संबंध में कई बार जिला प्रशासन व सरकार से संपर्क करने के बाद भी मोटर मार्ग का नामकरण नहीं किया जा सका है।
जिला पंचायत ने बनाया शहीद के नाम पर गेट
जिला पंचायत ने शहीद के गांव को जाने वाले मार्ग शरण में गेट बनाया है। जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी ने बताया कि शहीद मोहन सिंह के सम्मान में गेट का निर्माण किया गया है। गांव को सड़क से जोड़ने तथा कपकोट- कर्मी मोटर मार्ग शहीद के नाम करने की मांग को लेकर कई बार शासन अवगत कराने के बाद भी सरकार जनभावनाओं का खयाल नहीं रख रही है।