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दूर तलक जाएगी निकाय चुनाव में हार की कसक

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बागेश्वर। निकाय चुनाव में राजनीतिक दलों की हार की कसक आसानी से खत्म होने वाली नहीं है। प्रारंभिक चरण में दोनों दलों में हार के जो कारण सामने आ रहे हैं उससे तो यही लगता है। आगामी कुछ महीनों बाद होने वाले लोक सभा व पंचायत चुनावों में कार्यकर्ताओं को एकजुट करना हाईकमान के लिए चुनौती होगी।

बागेश्वर निकाय चुनाव में भाजपा व कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज करते हुए सबको चौंका दिया था। कांग्रेस तो पांचवें नंबर पर खिसक गई थी। प्रारंभिक समीक्षा में हार के जो करण सामने आए हैं उसमें भितरघात व क्रास वोटिंग शामिल है। ऐसे में पार्टी पदाधिकारियों व पार्टी प्रत्याशियों में अंदरूनी खींचतान व मनमुटाव जल्द खत्म होने वाला नहीं है। आगामी कुछ महीनों बाद ही पहले लोक सभा, फिर पंचायत चुनाव होने हैं। यदि राजनीतिक दल चुनाव के लिए एकजुट नहीं हुए तो उन्हें इस फूट का खामियाजा भुगतना होगा।
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इंसेट-
जिले की दोनों निकाय में हार निश्चित तौर पर ठेस पहुंचाने वाली है। हम सबने मेहनत की थी, इस परिणाम की उम्मीद नहीं थी। आशंका है कि कुछ लोगों ने गड़बड़ की होगी। सच क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा। गहन समीक्षा की जाएगी, जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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- शेर सिंह गढ़िया, जिलाध्यक्ष भाजपा
इंसेट-
कपकोट में तो परिणाम हमारे पक्ष में रहा, लेकिन बागेश्वर में पार्टी का पांचवें नंबर पर चला जाना चिंताजनक है। हम समीक्षा करेंगे। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके हिसाब से रणनीति बनाई जाएगी। भितरघात व क्रास वोटिंग के प्रमाण मिलते हैं तो ऐसे कार्यकर्ताओं पर भी निश्चित कार्रवाई होगी।
- लोकमणि पाठक, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
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