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कुंवारी के आपदा पीड़ितों को गाड़ाखरिक में बसाने की सुगबुगाहट से रोष

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बागेश्वर। कुुंवारी के आपदा प्रभावितों को अब गांव से चार किमी दूर गाड़ाखरिक बसाने की सुगबुगाहट शुरू होने से पीड़ितों में रोष पनपने लगा है। परेशान प्रभावितों ने डीएम से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा है कि गाड़ाखरिक में जाड़ों के मौसम से आठ फीट तक बर्फ गिरती है। ऐसे में वहां जीवन सुरक्षित नहीं होगा।

जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में आपदा प्रभावितों ने कहा कि वह गांव के आसपास जहां कृषि, पशुपालन और रोजगार के साधन हों ऐसी जगह विस्थापन चाहते हैं। ऐसे विस्थापन का वह कड़ा विरोध करते हैं जहां जीने के कोई संसाधन न हों। गांव से चार किमी दूर गाड़ाखरिक उच्च हिमालयी क्षेत्र में आता है। वहां जाड़ों में आठ फीट तक बर्फ गिरती है। अत्यधिक ठंड से लोगों के जीवन को खतरा होगा। वहां पीने के पानी भी दूर-दूर तक नहीं है। वहां बांज का घना जंगल है। पेड़ों के गिरने से मकानों को खतरा होगा।
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उन्होंने डीएम से किसी भी हालत में गाड़ाखरिक में विस्थापन नहीं कराने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में ग्राम प्रधान किशन सिंह दानू, राधा देवी, देवकी, नंदी, तुुलसी, चांदनी, हेमांती, हरूली, केशरी, प्रवीन, बलवंत राम, खुशहाल सिंह, कस्तूर, खिमुली, दीपा भवानी विजय राम समेत 54 प्रभावित शामिल हैं। उधर कपकोट के उप जिलाधिकारी रवींद्र बिष्ट ने बताया कि शासन ने नेली में 18 आपदा प्रभावितों के विस्थापन के लिए 76.50 लाख रुपये मंजूर किए हैं। घर निर्माण और अन्य कार्य के लिए प्रत्येक को 4.25 लाख रुपया दिया जाना है। प्रभावितों को इस समय चार हजार रुपया प्रति माह के हिसाब से मकान किराया दिया जा रहा है। प्रभावितों को गाड़ाखरिक में बसाने का अभी कोई तैयारी नहीं है। प्रभावितों को बगैर भू-वैज्ञानिकों की राय के नहीं बसाया जाएगा।
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