बागेश्वर। सूरजकुंड में खनन के कारण सरयू नदी के किनारे गड्ढे ही गड्ढे बने हुए हैं। इसके अलावा स्थान-स्थान पर गंदगी पसरी है। धार्मिक स्थल पर तमाम अव्यवस्थाओं के कारण वैशाख पंचमी पर जनेऊ संस्कार के लिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
उत्तरायणी, वैशाख पर्व पर बड़ी संख्या में जनेऊ संस्कार कराने के लिए लोग सूरजकुंड आते हैं। धार्मिक महत्व के बावजूद इस क्षेत्र को उपेक्षित छोड़ा गया है। यहां जाने के लिए उचित मार्ग तक नहीं है। शुक्रवार को जनेऊ संस्कार के लिए यहां पहुंचे श्रद्धालुओं को तमाम अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ा। नदी किनारे पडे़ गड्ढों के कारण श्रद्धालुओं को बैठने तक को स्थान नहीं मिला। नगर के लोगों ने सूरजकुंड के धार्मिक महत्व को देखते हुए इस क्षेत्र में खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने और यहां पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
गढ़वाल से भी पहुंचते है लोग
बागेश्वर। वैशाख पंचमी को यज्ञोपवीत संस्कार के लिए उपयुक्त पर्व माना जाता है। इस पर्व को सूरजकुंड में हर साल सैकड़ों लोग जनेऊ संस्कार कराने आते हैं। पंडित पीडी पाठक ने बताया कि सूरजकुंड में सदियों से जनेऊ संस्कार होते आ रहे हैं। यज्ञोपवीत संस्कार के लिए अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जनपदों के साथ ही गढ़वाल से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं।