बागेश्वर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय पेठी के भवन की क्षतिग्रस्त छत। संवाद
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बागेश्वर। जिले में अधिकतर सरकारी स्कूल भवनों की दशा बेहद दयनीय है। जिले में 67 स्कूल जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं। इन स्कूल भवनों में खतरे के साये में पढ़ाई हो रही है।
जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और नव निर्माण का प्रस्ताव शासन में लंबित है। बरसात से पहले स्कूल भवनों की मरम्मत और नव निर्माण के लिए बजट अवमुक्त होने की उम्मीद थी लेकिन यह उम्मीद भी धरी रह गई। हां, कुछ स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए जिला योजना से अवश्य बजट आवंटन हुआ है।
जिले में स्कूल भवनों की दशा लंबे समय से खराब है। जर्जर स्कूल भवनों में सरकारी इंटर कॉलेज, हाईस्कूल और प्राथमिक स्कूल शामिल हैं। कपकोट ब्लॉक के दूरस्थ इलाके पेठी के प्राथमिक स्कूल भवन की छत पिछले दो साल से क्षतिग्रस्त पड़ी है। छत के लिंटर में दरारें आ गई हैं। पेठी के ग्राम प्रधान तारा सिंह देवली ने बताया कि दो साल से स्कूल भवन की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसी ही कुछ हालत अन्य स्कूल भवनों की भी है।
सरकारी स्कूलों में शौचालयों की व्यवस्था लगभग ठीक है। सीईओ गजेंद्र सौन के अनुसार स्कूल भवनों की मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही स्कूल भवनों की मरम्मत और नव निर्माण कराया जाएगा।
सुमगढ़ हादसे में 18 स्कूली बच्चों की गई थी जान
बागेश्वर। 18 अगस्त 2010 का दिन जिले के लोग कभी नहीं भूल सकते। 18 स्कूली बच्चे स्कूल में ही जिंदा दफन हो गए थे। कपकोट ब्लॉक के सुमगढ़ में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पहाड़ी में हुए भूस्खलन का मलबा घुस गया था। 18 बच्चे मलबे में दब गए थे। मृतकों में नौ बालक और नौ बालिकाएं शामिल थीं। हादसे की याद जेहन में आते ही आज भी लोग सिहर उठते हैं। संवाद