फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजकीय पॉलीटेक्निक कपकोट में पढ़ता है सिर्फ एक छात्र

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बागेश्वर। जिले में तकनीकी शिक्षा बदहाल है। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कांडा, कपकोट तथा गरुड़ की स्थिति काफी खराब है। इनमें व्याख्याता, कर्मशाला अनुदेशक के पद कई सालों से खाली चल रहे हैं। यह हैरान करने वाली बात है कि राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कपकोट में सिर्फ एक छात्र पढ़ रहा है। कपकोट का यह पॉलीटेक्निक कॉलेज आईटीआई के भवन में संचालित हो रहा है।

राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कपकोट वर्ष 2011 में अस्तित्व में आया। शुरुआत में इस कॉलेज को पॉलीटेक्निक ताकुला में संबद्ध कर संचालित किया गया। 2014 से इसे कपकोट में आईटीआई भवन के प्रथम तल में संचालित किया जा रहा है। इस संस्थान में एक मात्र ट्रेड मार्डन आफिस मैनेजमेंट एंड सेक्रेटियल प्रैक्टिस स्वीकृत है। जिसमें सिर्फ एक विद्यार्थी अध्ययनरत है। कॉलेज के नाम पर कपकोट बाजार से तीन किमी दूरी पर 100 नाली जमीन है। भवन निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कॉलेज में विभागाध्यक्ष, व्याख्याता के तीन पद खाली चल रहे हैं। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कांडा वर्ष 2006 में खोला गया।
विज्ञापन


शुरुआत में इसे पॉलीटेक्निक कॉलेज द्वाराहाट में संचालित किया गया। वर्ष 2009 से इसे कांडा में संचालित किया जा रहा है। कॉलेज में एकमात्र ट्रेड मेकेनिकल इंजीनियरिंग स्वीकृत है। कॉलेज में कुल 74 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। मेकेनिकल इंजीनियरिंग में व्याख्याता के तीन पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। हॉस्टल की सुरक्षा दीवार तक नहीं है। इस कारण छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना रहता है। संस्थान में इंटरनेट कनेक्शन भी नहीं है।
राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज गरुड़ की स्थिति भी बेहतर नहीं है। यह कालेज 2007 से संचालित हो रहा है। यहां सिर्फ मेकेनिकल इंजीनियरिंग ट्रेड स्वीकृत है। कॉलेज में व्याख्याता के तीन पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। कर्मशाला अनुदेशक के भी दो पद खाली हैं। कर्मशाला अनुदेशक नहीं होने से प्रयोगात्मक कार्य आदि में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


नौ साल बाद भी नहीं बना हॉस्टल
बागेश्वर। राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज गरुड़ में नौ साल बाद भी हॉस्टल नहीं बन सका है। हॉस्टल नहीं होने के कारण इस संस्थान में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं बाजार में किराये के भवनों में रहने को मजबूर हैं। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से ताल्लुक रखने वाले छात्र-छात्राओं को मकान का किराया चुकाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कैंटीन नहीं होने के कारण छात्र-छात्राएं होटलों का महंगा खाना खाने को मजबूर हैं।
कोट
-राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज गरुड़ में हॉस्टल सुविधा नहीं है। भवन की चहारदीवारी नहीं की गई है। कर्मशाला अनुदेशक, व्याख्याता के पद खाली होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हुकुम चंद्र, प्रधानाचार्य राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज गरुड़ (बागेश्वर)।

-राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कपकोट के लिए कपकोट बाजार से करीब तीन किमी दूरी पर 100 नाली भूमि अर्जित कर ली है। संस्थान के भवन निर्माण करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जिसे फिलहाल मंजूरी नहीं मिली है।
विज्ञापन

एमएस हसन, प्रधानाचार्य राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कपकोट (बागेश्वर)

-पॉलीटेक्निक कॉलेज कांडा में व्याख्याता के तीन, बेसिक साइंस व्याख्याता के तीन पद रिक्त चल रहे हैं। व्याख्याता के पद शासन द्वारा आयोग के माध्यम से भरे जाते हैं।
डॉ. संजीव कुमार, प्रधानाचार्य राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज कांडा (बागेश्वर)।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें